गत 26 जनवरी को शुरू हुई योजना में फर्जीवाड़े की गुंजाइश न के बराबर बनाई गई थी। लेकिन, इसकी साख पर बट्टा लगाने वाले अस्पतालों ने नई-नई तरकीब निकालकर फर्जीवाड़े कर अब तक करीब 53 लाख रुपये से ज्यादा का क्लेम हड़प लिया है। जबकि, लगभग 52 लाख रुपये का क्लेम कार्रवाई के तौर पर बीच में रोक दिया गया। हालांकि, अब गलत तरीके से हड़पी गई क्लेम की राशि का पांच गुना तक वसूलने की बात कही जा रही है, लेकिन अभी तक किसी अस्पताल पर इस तरह की कार्रवाई नहीं की गई है।
सॉफ्टवेयर ऐसे करेगा काम
- किसी अस्पताल ने मरीज को आईसीयू से ही छुट्टी देना दर्शाया तो क्लेम पास नहीं होगा।
-एक डॉक्टर का नाम यदि दो अस्पतालों में दर्ज है तो अस्पताल को क्लेम जारी नहीं होगा।
- रेफर स्लिप पर यदि संबंधित अस्पताल के चिकित्सक के साइन नहीं होगे तब भी क्लेम नहीं।
-प्री-अथोराइजेशन के बिना इलाज शुरू किया तो क्लेम को तत्काल ही रोक दिया जाएगा।
जिला स्तर पर भी बनेगी एंटी फ्रॉड कमेटी
प्रदेश में डॉक्टर, आईटी एक्सपर्ट और प्रशासनिक स्टाफ को मिलाकर एंटी फ्रॉड कमेटी बनाई जा चुकी है। चूंकि, योजना का दायर बड़ा है तो अकेली इस कमेटी पर ज्यादा बोझ बढ़ जाएगा। इसको भाग में बांटने के लिए जिला स्तर पर एंटी फ्रॉड कमेटियां बनाई जाएंगी। इस तरह की कमेटियों को बनाने का प्रावधान भारत आयुष्मान की केंद्रीय नियमावली में भी है। इन कमेटियों को नियमावली के आधार पर गठित किया जाएगा।