नशा नहीं, रोजगार दो आंदोलन में वह अपने साथियों के साथ 40 दिन तक जेल में रहे। राज्य के कई अन्य आंदोलनों के दौरान भी वह कई बार गिरफ्तार हुए। उन्होंने 1974 में अपने तीन अन्य साथियों के साथ अस्कोट से आराकोट तक 45 दिन की यात्रा की।
1977 में उत्तराखंड जन संघर्ष वाहिनी के गठन के बाद डॉ. बिष्ट और कुछ अन्य नेताओं के नेतृत्व में वनों को बचाने के लिए जबरदस्त आंदोलन हुआ। उत्तराखंड के अलावा देश में मानवाधिकार, पर्यावरण, नदियों आदि के मुद्दों को लेकर भी वह देश के विभिन्न इलाकों में आयोजित सम्मेलनों और जागरूकता कार्यक्रमों में हिस्सा लेते रहे।
अंतिम विदाई देने ये भी पहुंचे
डा. शमशेर सिंह की अंतिम विदाई देने के लिए केंद्रीय कपड़ा राज्यमंत्री अजय टम्टा, राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल सहित राज्य भर से तमाम सामाजिक संगठनों से जुड़े कार्यकर्ता, पत्रकार और कई अन्य बुद्धिजीवी मौजूद थे। उनके निधन पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, केंद्रीय कपड़ा राज्यमंत्री अजय टम्टा, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट, विधानसभा उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चौहान, जाने माने इतिहासकार प्रो. शेखर पाठक, वरिष्ठ पत्रकार राजीव लोचन साह, उपपा के केंद्रीय अध्यक्ष पीसी तिवारी, अल्मोड़ा के जिलाधिकारी नितिन भदौरिया सहित तमाम जन प्रतिनिधियों और संगठनों ने गहरा शोक व्यक्त किया है।