उत्तराखंड में मौसम की करवट खतरनाक साबित हो रही है। एक और रुक-रुक कर हो रही बर्फबारी खतरे का सबब बनी हुई तो कहीं भूकंप के झटके प्रदेश के लोगों को डरा रहे हैं।
बीते तीन माह से रुक-रुककर जारी बर्फबारी के बाद अब अपर भागीरथी घाटी में हिमस्खलन की चपेट में हैं। धराली से गंगोत्री की ओर चांगथांग समेत तीन बड़े हिमखंड हाईवे पर आ गए हैं। इससे आगे गंगोत्री क्षेत्र में भी ग्लेशियरों का खतरा बना हुआ है। वहीं बीआरओ ने हिमखंड काटकर यातायात बहाली के प्रयास में जुट गया है।
इस बार की सर्दियों में दिसंबर 2014 से निश्चित अंतराल पर बर्फबारी का सिलसिला जारी है। ऐसे में मार्च मध्य तक भी कड़ाके की ठंड के साथ ही अपर भागीरथी घाटी में हिमस्खलन का खतरा बढ़ गया है।
बीते दो दिनों से बर्फबारी का दौर थमने के बाद भी धराली से गंगोत्री की ओर आरों, चांगथांग और जांगला पुल के पास तीन बड़े हिमखंड गंगोत्री हाईवे पर आ गए हैं। बीते सोमवार को आया चांगथांग ग्लेशियर का हिमखंड गंगोत्री हाईवे को पार कर भागीरथी के दूसरे छोर तक पसर गया है।
फिलहाल इन स्थानों पर हिमखंड काटकर बीआरओ यातायात बहाली के प्रयास में जुटा है। मौसम के इस रुख को देखते हुए उपला टकनौर क्षेत्र में सेब के बागीचों पर भी हिमस्खलन का खतरा मंडराने लगा है। छोलमी, सुक्की बैंड, जसपुर बैंड, पुडगा आदि स्थानों पर हिमखंड आने की आशंका से सेब किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें हैं।
सेब काश्तकार डॉ. नागेंद्र रावत का कहना है कि बीस साल पहले भी इसी तरह का मौसम रहा था। तब हिमखंडों से सेब के बागीचों को खासा नुकसान पहुंचा था।
अस्कोट में भूकंप का हल्के झटके
उधर पिथौरागढ़ जिले के अस्कोट तथा आसपास के इलाकों में बुधवार सुबह पांच बजे भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। सुबह भूकंप के झटकों से सोए हुए लोग हड़बड़ाहट में उठ गए।
भूकंप से किसी प्रकार के नुकसान की सूचना नहीं है। मौसम विभाग के रिकार्ड में यह भूकंप दर्ज नहीं है। मौसम विभाग के निदेशक आनंद शर्मा अनुसार कम तीव्रता वाले भूकंप रिक्टर पैमाने पर अंकित नहीं हो पाते हैं।
केदारनाथ को रोपवे से जोड़ने की योजना फाइलों तक
केदारनाथ को रोपवे से जोड़ने की योजना फाइलों तक सिमटी है। लिनचौली से केदारनाथ तक करीब तीन किमी रोपवे का निर्माण होना है। आपदा के बाद सरकार ने केदारनाथ में रोपवे निर्माण को अपनी प्राथमिकता में शामिल किया था, लेकिन अब तक मामला प्रारंभिक सर्वे तक ही सिमटा हुआ है।
11500 फीट की ऊंचाई पर स्थित केदारनाथ को रोपवे के जरिये रामबाड़ा से जोड़ने के लिए वर्ष 2006 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने घोषणा की थी, तब से अब तक किसी ने भी इस रोपवे के निर्माण को लेकर कोई सुध नहीं ली। जून 2013 में आई आपदा के बाद प्रदेश सरकार ने लिनचौली से केदारनाथ तक रोपवे निर्माण की बात कही थी, लेकिन डेढ़ वर्ष बाद भी योजना प्रारंभिक सर्वेक्षण पर अटकी है।
रोपवे से कुछ ही मिनटों में पहुंचेंगे केदारनाथ
लिनचौली से केदारनाथ पहुंचने के लिए अभी सात किमी की खड़ी चढ़ाई चढ़नी पड़ रही है। आपदा के बाद रास्ते का पुनर्निर्माण कर इसे सुगम तो बनाया गया है, लेकिन दूरी में कुछ इजाफा हो गया है।
इसे तय करने में डेढ़ से दो घंटे का समय लगता है। जबकि रोपवे बनने से लिनचौली से 10 से 15 मिनट में केदारनाथ पहुंचा जा सकेगा।
लिनचौली से केदारनाथ तक रोपवे निर्माण प्रस्तावित है। प्रारंभिक सर्वेक्षण हो चुका है। कितना धन इस पर लगेगा, इसके लिए संभवत: मई-जून में डीपीआर तैयार कर शासन को भेज दी जाएगी।
- डॉ. राघव लंगर, जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग
केदारनाथ में लगी पहली क्रशर मशीन
केदारनाथ में एक क्रशर मशीन स्थापित कर दी गई है। मंदिर परिसर से करीब दो सौ मीटर पीछे क्रशर लगाया गया है। आगामी एक-दो दिन से क्रशर से रोड़ी बनाने का कार्य भी शुरू कर दिया जाएगा। पत्थरों के ढेर लगाए जा चुके हैं।
मंदिर समिति के भंडारण वाले क्षेत्र में तीन से चार फीट तक तक बर्फ की सफाई की गई। बर्फ को पूरी तरह से साफ करने में कम से कम पांच दिन का और समय समय लग सकता है। धाम में अब भी 10 फीट से अधिक बर्फ जमा है।
हेलीपैड से मंदिर जाने वाले मार्ग सहित अन्य स्थानों पर भी निम ने कई फीट बर्फ काटकार उसके ढेर लगाए हैं। इधर गुप्तकाशी से हेलीकॉप्टर से 12 कुंतल से अधिक खाद्यान्न और अन्य जरूरी सामग्री भी केदारनाथ पहुंचाई गई।
धाम में चार दिन से बिजली गुल
बीते रविवार-सोमवार को हुई भारी बर्फबारी से भीमबली से केदारनाथ तक ऊर्जा निगम की विद्युत लाइन बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई है। आठ किमी मार्ग पर बिजली के कई पोल ढह गए हैं, लाइन टूट गई हैं, इस वजह से केदारनाथ में बिजली सप्लाई ठप हैं।
यहां जेनरेटर की मदद से व्यवस्था बनाई गई है। ऊर्जा निगम के एसडीओ अर्चित भट्ट ने बताया कि विद्युत लाइनों को काफी नुकसान हुआ है। बृहस्पतिवार को मौके का निरीक्षण का सही स्थिति का पता लग सकेगा। मौसम ठीक रहा तो कम से कम 10 दिन में टूटी विद्युत लाइन को ठीक किया जा सकेगा।