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मुस्लिम की चौखट से उठी हिंदू बेटी की डोली

Thu, 12 Mar 2015 10:44 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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मजहब के बंधनों से पार जाकर मुस्लिम पिता ने हिंदू बेटी सुनीता की शादी कराकर नई इबारत लिखी है। शादी के बाद मुस्लिम परिवार बेटी के प्रेमनगर स्थित ससुराल की रिसेप्शन पार्टी में शामिल हुआ और उन्होंने बेटी और दामाद को सुखद वैवाहिक जीवन की शुभकामनाएं दी।
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देहरादून के धर्मपुर स्थित प्रगति विहार में अजहरुल हादी और उनकी पत्नी नाहीद खुश हैं। बेटी के विदा होने का हर मां-बाप की तरह उन्हें भी दुख है, लेकिन उसकी भविष्य में आने वाली खुशियों को लेकर खुशी से फूले नहीं समा रहे हैं। दस साल से जिस बेटी को उन्होंने फूलों की तरह रखा वह अब विदा होकर सुसराल जा चुकी है।

बुजुर्ग अजहरुल हादी और उनकी पत्नी सुनीता को दस साल पहले घर का काम करने के लिए लाए थे। लेकिन, धीरे-धीरे वह परिवार का हिस्सा बन गई।

नाजों में पली बेटी, पिता की थी लाडली

अजहरुल हादी और उनकी पत्नी ने उसे कभी अपनी बेटी हीरा अजहर से कम नहीं समझा। सुनीता भी उनकी हर जरूरत का ख्याल रखती थी।

दस साल के इस रिश्ते की अहमियत को देखते हुए ही हादी परिवार ने सुनीता की शादी का फैसला किया। उसकी शादी उन्होंने प्रेमनगर निवासी विक्की से तय की। यूपी में अमेठी के पास एक गांव में रहने वाले सुनीता के पिता राकेश, माता चमेला देवी और भाई विजय ने भी इस रिश्ते को तुरंत हां कर दी।

मंत्रोच्चार के साथ हुआ विवाह
मंगलवार को सनातन धर्म मंदिर में हिंदू रीति रिवाजों से सुनीता ने सात फेरे लिए। इस दौरान हुए मंत्रोच्चार में हादी परिवार ने भी शिरकत की और सुनीता की आरती भी उतारी। बुधवार को सुनीता के असली माता पिता अपने गांव के लिए विदा हो गए। शाम को हादी परिवार रिसेप्शन में शामिल होने सुनीता के ससुराल पहुंचे।
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दीवाली पर जगमगाता था घर

अजहरुल हादी का कहना है कि सुनीता उनके लिए बेटी से बढ़कर थी। वह उसकी हर खुशी का ख्याल रखते थे। सुनीता की खुशी के लिए ही वह दीवाली के अवसर पर पूरे घर को लाइटों से रौशन करते थे। इसी तरह सुनीता घर में रंगोली भी बनाती थी। उसे अपने धर्म का पालन करने की पूरी आजादी दी गई थी।

रमजान में सुनीता बनाती थी सहरी
इसी तरह अगर कई बार रमजान में नाहीद की तबीयत खराब होती तो सुनीता बिना कुछ कहे खुद ही सहरी के वक्त पर उठकर खाना बना देती थी। अगर नाहीद मना करती तो वह उनकी सहूलियत के लिए आटा बनाकर तैयार करके रख देती थी।

अजहरुल हादी का कहना है कि उनके लिए सुनीता का नाम तो जैसे जुबान से उतर ही नहीं रहा है। शादी के अगले दिन भी कई बार उनके मुंह से सुनीता का नाम निकला।
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