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उत्तराखंड में कई चोटियों ने 40 साल बाद ओढ़ी बर्फ की चादर

Wed, 18 Jan 2017 11:51 AM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
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snowfall
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हिम रेखा के ऊपर खिसकने से घबराए जलवायु परिवर्तन विशेषज्ञों ने राहत की सांस ली है। इस बार पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी से हिम रेखा नीचे आ गई है।
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मध्य हिमालयी क्षेत्र की कई पर्वतीय चोटियां ऐसी हैं जिन्हें मौसम के ताजा मिजाज से 40 साल बाद बर्फ की सफेद चादर ओढ़ने को मिली है। कई सालों से इन क्षेत्रों के पहाड़ों को ‘निर्जन’ कहा जा रहा था। बर्फबारी के कारण पहाड़ों के निचले हिस्से में रह रहे लोगों को इस बार गर्मी भी अधिक नहीं सता पाएगी।

बर्फबारी से हिमनद और हिम अध्ययन से जुड़े विज्ञानी बहुत खुश हैं। इसके साथ ही बर्फबारी के संबंध में अध्ययन शुरू कर दिया गया है। देहरादून जिले के चकराता क्षेत्र के कनासर, देवगन समेत प्रदेश के पर्वतीय जिलों की कई चोटियां ऐसी हैं जहां 40 साल के बाद बर्फ गिरी है। इस अरसे में बर्फबारी तो हुई थी, लेकिन इन इलाकों में सन्नाटा रहा। इस बार इन क्षेत्रों में भी पांच-छह सेंटीमीटर से लेकर दो फीट तक बर्फ रास्तों में जमी है।
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दिसंबर के महीने तक जलवायु परिवर्तन से जुड़े विज्ञानी हिम रेखा के और ऊपर खिसक जाने से घबरा रहे थे। हिम रेखा ऊपर जाने से कई प्रकार की वनस्पतियां और कीट संसार प्रभावित हो रहा था। इसमें महत्वपूर्ण कीड़ाजड़ी भी शामिल है। विज्ञानियों का कहना है कि जितनी हिम रेखा ऊपर जाएगी, कीड़ाजड़ी मिलना कम होगा।
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बर्फ के नीचे ही कीड़ा जड़ी पनपती है। लेकिन इस बर्फबारी ने हिम रेखा को कई मीटर नीचे ला दिया है। वन अनुसंधान संस्थान के इकोलोजी, क्लाइमेट चेंज एवं फोरेस्ट इंफ्लुएंस डिवीजन के विज्ञानी डा. हुकुम सिंह का कहना है कि बर्फबारी से जैव विविधता को भी फायदा होगा। वनस्पतियों के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध रहेगा।

बर्फबारी की निरंतरता रहना और हिम रेखा का टिके रहना जरूरी है। यह एक अहम पहलु है। यह पहाड़ों की सेहत के लिए भी अच्छा है।
- डा. अमित कुमार, वरिष्ठ विज्ञानी, वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान
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