छात्रों और अकेले नौकरीपेशा लोगों के लिए लाई गई छोटे गैस सिलेंडरों की योजना देहरादून में धराशायी होने लगी है। स्थिति यह है कि महीने में 10 से 15 सिलेंडरों की मांग ही तेल कंपनी को मिल रही है। इस कारण कंपनी भी योजना पर ज्यादा रुचि नहीं दिखा रही है।
शहर में अकेले रह रहे नौकरीपेशा, छात्र और मजदूर वर्ग को देखते हुए इंडियन ऑयल कारपोरेशन (आईओसी) ने अप्रैल 2014 में 5 किग्रा के गैस सिलेंडर बेचने की योजना शुरू की। पायलट प्रोजेक्ट के रूप में बल्लूपुर स्थित आशीर्वाद फिलिंग स्टेशन पर योजना शुरू की गई।
शुरूआत में अच्छी रही डिमांड
योजना में कोई कनेक्शन और कागजों का झंझट नहीं रखा गया। सिर्फ अपनी आईडी दिखाने पर पांच किलो गैस वाला सिलेंडर दिए जाने की योजना थी। कंपनी ने इसकी कीमत 1612 रुपये रखी है।
शुरुआती कुछ महीनों तक सिलेंडर की मांग अच्छी रही, जिसे देखकर आईओसी ने एस्लेहॉल स्थित सहकारी गैस एजेंसी पर भी यह योजना शुरू की थी। लेकिन करीब नौ महीने के अंदर ही यह योजना धड़ाम होने लगी है।
महंगे सिलेंडर से लोग बना रहे दूरी
तेल कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि महीने में 10 से 15 सिलेंडर की मांग आजकल मिल रही है। इसका कारण सिलेंडर का महंगा होना बताया जा रहा है। आईओसी के देहरादून वितरण अधिकारी रोहन दलाल का कहना है कि योजना चल रही है। मगर डिमांड कम है। इसे दूर करने के प्रयास किए जाएंगे।