यह होगा लाभ
गांव-गांव तक छोटे हाइड्रो पावर प्लांट लगाने पर एक ओर जहां उस गांव के लोगों को रोजगार मिलेगा तो दूसरी ओर गांव या आसपास के कई गांवों में बिजली की आपूर्ति की राह आसान हो जाएगी। चूंकि, उत्तराखंड की नदियों में पानी का वेग काफी तेज है। इसलिए यहां स्टोरेज पानी के बजाय चलते पानी पर आसानी से छोटे प्लांट लगाए जा सकते हैं।
तेजी से बढ़ रही बिजली की जरूरत
प्रदेश में कोरोना लॉकडाउन के बाद से बिजली खपत के नए रिकॉर्ड बने हैं। पहली बार बिजली की मांग रोजाना 60 मिलियन यूनिट तक पहुंची। इसके सापेक्ष केंद्रीय व राज्य पूल से रोजाना करीब 35 से 40 मिलियन यूनिट तक उपलब्धता ही होती है। बाकी बिजली बाजार से खरीदनी पड़ती है। किल्लत की वजह से इस साल लोगों को बिजली कटौती की समस्या से भी जूझना पड़ा।
बड़े पावर प्रोजेक्ट की राह मुश्किल
सरकार ने वर्ष 2005 से 2010 के बीच दो दर्जन से अधिक जलविद्युत परियोजनाओं को मंजूरी दी थी। 30 हजार करोड़ की लागत वाली इन परियोजनाओं के पूरा होने से 2944.80 मेगावाट बिजली उत्पादन होता। गैर सरकारी संगठनों की ओर से एक-एक कर 24 छोटी-बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं का मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया। यह प्रकरण एनजीटी भी पहुंचा हुआ है। अदालत के आदेश पर वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने विशेषज्ञों की 12 सदस्यीय समिति गठित की थी। कई महीने के अध्ययन के बाद समिति ने अपनी रिपोर्ट मंत्रालय को दे दी थी। मंत्रालय की ओर से यह रिपोर्ट अदालत को सौंप दी गई, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इन 24 परियोजनाओं पर रोक लगा दी थी।
ये भी पढ़ें...Uttarakhand Weather: बदला मौसम, पहाड़ से मैदान तक बारिश, दो जिलों में येलो अलर्ट जारी
प्रदेश में 25 मेगावाट तक की छोटी जल विद्युत परियोजनाओं की बहुत संभावना है। गांव-गांव तक अपनी बिजली और अपने रोजगार के लिए हम हाइड्रो पावर पॉलिसी तैयार कर रहे हैं। इसके लिए हिमाचल प्रदेश की पॉलिसी का अध्ययन किया जा रहा है। इसमें कई तरह की रियायतें दी जाएंगी, ताकि लोग प्रोजेक्ट लगाने के लिए प्रोत्साहित हों।
- आर मीनाक्षी सुंदरम, सचिव, ऊर्जा