हाईकोर्ट ने पिछले साल दिसंबर में अभियान चलाने के आदेश दिए थे। बावजूद इसके अभियान की याद पुलिस को करीब एक साल बाद याद आई। यही नहीं केवल तीन दिनों में ही अभियान की इतिश्री कर दी गई। जबकि, यदि देखा जाए तो अभियान महज एक ही दिन चल पाया। इसका कारण है कि एक दिन जाने में और एक दिन आने में लगा।
सरकार की मंशा पर सवाल
समय समय पर मिल रहे कंकाल पूर्व की सरकारों के कामकाज पर भी सवालिया निशान लगा रहे हैं। बता दें आपदा के बाद विजय बहुगुणा सरकार ने सघन सर्च ऑपरेशन चलाने का दावा किया था। इसके बाद हरीश रावत सरकार ने भी अभियान चलवाया था। मौजूदा सरकार के समय भी इस दिशा में विशेष काम नहीं हुआ। सूत्रों की मानें तो आपदा क्षेत्र में अब भी बड़ी संख्या में कंकाल पड़े हुए हैं।