केदारनाथ धाम में नरकंकाल मिलने के मामले में अब सियासत तेज होने लगी है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के टकराव के बीच अब तीर्थ पुरोहित भी सामने आने लगे हैं।
केदारनाथ मंदिर समिति भी इसमें एक सिरा थामे नजर आ रही है। 16/17 जून की आपदा के ठीक दो साल पूरे होने के मौके पर धाम में दो और नरकंकाल मिलने के बाद हल्ले से सरकार दबाव में है यह बात बुधवार को साबित भी हुई।
खुद मुख्यमंत्री हरीश रावत को कहना पड़ा कि केदारनाथ में जब तक मलबा नहीं हटाया जाता, तब तक हर बार खुदाई में नरकंकाल मिलते रहेंगे। पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कुछ दिनों पूर्व कहा था कि केदारनाथ में और नरकंकाल न मिले तो इस्तीफा दे दूंगा।
बुधवार को मुख्यमंत्री हरीश रावत नेभी कहा कि अगर यह उम्मीद की जा रही है कि सरकार बेलचा फावड़ा लेकर यही काम करे तो यह संभव नहीं है। सरकार का ध्यान आपदा से प्रदेश को उबारने पर है। जैसी त्रासदी थी उससे इनकार नहीं किया जा सकता कि केदारनाथ में नरकंकाल मिलते रहेंगे।
केदारनाथ में 16 जून को आई आपदा के बाद धाम में मलबा अभी तक पसरा है। सरकार और विपक्ष को इससे इनकार नहीं है कि खुदाई हुई तो और नरकंकाल मिलेंगे। केदारनाथ में बीकानेर हाउस, पंजाब सिंह क्षेत्र, हिमाचल हाउस, गुजरात भवन सहित करीब नौ तीर्थ पुरोहित परिवारों के भवन हैं, जिनको ध्वस्त किया जाना बाकी है।
ये बहुमंजिला भवन केदारनाथ मंदिर के पास ही हैं और इनके ध्वस्तीकरण पर तीर्थ पुरोहित अभी पूरी तरह से सहमत नहीं हुए हैं। बताया जा रहा है कि तीर्थ पुरोहितों का एक वर्ग इस कोशिश में है कि नए भवन उसी स्थान पर बनाए जाएं जहां पुराने भवन हैं। केदारनाथ को माडल टाउन बनाने की कोशिश कर रही सरकार इस पर सहमत नहीं है।
ये तीर्थ पुरोहित इस बात पर सहमत तो हैं कि मकानों में मलबे की सफाई हो लेकिन भवन छोड़ने को फिलहाल तैयार नहीं है। ऐसे में केदारनाथ में नर कंकालों का मिलना तीर्थ पुरोहितों के हित में सरकार पर दबाव का काम भी कर रहा है। केदार सभा पहले इस बात पर नाराज थी कि आपदा के बाद राहत सबको दी गई पर पुरोहितों को छोड़ दिया गया। सरकार को बाद में पुरोहितों को राहत पैकेज का ऐलान कर मनाना पड़ा।
दूसरी ओर केदारनाथ मंदिर समिति भी इसमें उलझी हुई नजर आ रही है। मंदिर समिति का रोल इस समय केदारनाथ में बहुत हद तक सीमित हो गया है। समिति भी पुरोहितों को नाराज नहीं करना चाह रही है। ऐसे में नरकंकाल मिलने से सामने आ रहा दबाव भी समिति के पक्ष में ही जा रहा है। ऐसे में भाजपा को भी यह मुद्दा हाथ लगा है।
सूत्रों के मुताबिक पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखिरियाल निशंक को केदारनाथ में मानव पंजा मिला था तो तीर्थ पुरोहितों का एक खास दल उनके साथ था। दूसरी बार मंगलवार को भी नरकंकाल मंदिर समिति की ओर से की गई उदक ताल की सफाई में मिला।
नरकंकाल की बात उठा कर क्या साबित करना चाहते हैं मैं समझ नहीं पाया। पूर्व मुख्यमंत्री निशंक पहले कह रहे थे कि यात्रा पर लोगों को कफन बांध कर आना पड़ेगा। खुद निशंक बिना कफन बांधे केदारनाथ हो आए। केदारनाथ में हजारों टन मलबा है। मालपा में आए भूस्खलन ने प्रतिमा बेदी को लील लिया था। आज तक उनका शव निकाला नहीं गया। रूपकुंड में नरकंकाल मिले। हिमालय अभियान में कई हताहत होते हैं, क्या सबके शव खोज कर लाए जाते हैं। प्रदेश सरकार ने कभीनहीं कहा कि खोज अभियान बंद कर दिया गया है। पर सरकार बेलचा फावड़ा लेकर इसी में लग जाए, मैं इससे सहमत नही हूं।
- हरीश रावत, मुख्यमंत्री
केदारनाथ में अब भी अपनों की तलाश
16/17 जून 2013 की आपदा में केदारनाथ धाम में हुई तबाही के बाद से अब तक निजी भवनों की सफाई नहीं होने पर तीर्थ पुरोहितों ने सरकार को आड़े हाथ लिया है। कई तीर्थ पुरोहित अब भी यहां कंकालों की खोजबीन कर आपदा में खोए अपनों को तलाश रहे हैं। उनका कहना है कि मजदूरों की मदद से भी मलबे से पटे निजी भवनों सहित मंदिर परिसर के एक से डेढ़ सौ मीटर के दायरे में सफाई कर वहां दबे कंकाल बाहर निकाले जा सकते हैं।
केदारनाथ नगर पंचायत के पूर्व अध्यक्ष दिनेश बगवाड़ी, विपिन सेमवाल, राजेंद्र प्रसाद तिवारी, विनोद शुक्ला का कहना है कि सरकार जीएसआई और एएसआई का हवाला देकर केदारनाथ में आपदा से एकत्र मलबे को नहीं छेड़ने की बात कह रही है, लेकिन जब जेसीबी धाम में सरकारी और कुछ निजी भवनों को तोड़ रही थी, तब यह बात क्यों नहीं कही गई।
तीर्थ पुरोहित अरुण प्रकाश वाजपेयी का यहां तक कहना है कि तबाही के दिन उन्होंने केदारनाथ में नेपाल भवन के आंगन में स्वयं शवों को मलबे में दबते हुए देखा था। सीतापुर धर्मशाला, मेरठ मंडल, मुंबई हाउस, बाजार चौक, कालीकमली धर्मशाला के आंगन और गली में भी यही स्थिति थी। इन स्थानों पर कई शव तीन से छह फीट मलबे में दबे हो सकते हैं।
कंकाल के अवशेषों का किया दाह संस्कार
केदारनाथ धाम में मंगलवार को मिले दो कंकालों के अवशेषों का डीएनए सैंपल लेने के बाद दाह संस्कार कर दिया गया है। मंगलवार को मंदिर से पचास मीटर दूर उदक कुंड के समीप मिले दो कंकालों के अवशेष मिले थे। मंदाकिनी नदी किनारे कंकाल के अवशेषों का दाह संस्कार कर दिया गया।
पुलिस अधीक्षक बीजे सिंह ने बताया कि केदारनाथ में पुलिस व एसडीआरएफ के जवान मंदिर परिसर से लेकर करीब दो किमी क्षेत्र में कंकाल या कंकाल के अवशेषों की खोजबीन कर रहे हैं। इस संबंध में धाम में मौजूद तीर्थ पुरोहितों से भी सहयोग की अपील की गई है।