राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) में अब सिपाही से लेकर दारोगा तक छह साल से ज्यादा नहीं टिक पाएंगे। चार साल में वह सिविल पुलिस में अपनी वापसी करा सकते है।
अधिकारियों की संस्तुति पर उनका दो साल का कार्यकाल और बढ़ सकता है। पुलिस मुख्यालय ने पहली बार नियुक्ति पॉलिसी तैयार कर पुलिस कर्मियों को बड़ा तोहफा दिया है। अब तक जीआरपी में जाने वाले पुलिस कर्मियों की वापसी का कोई रास्ता नहीं था।
पुलिस मुख्यालय ने पुलिस सेवा नियमावली के बाद जीआरपी की नियुक्ति पालिसी जारी कर दूसरा बड़ा काम किया है। अब तक जीआरपी की नियुक्ति पालिसी नहीं थी। पहाड़ चढ़ने से बचने को सिविल पुलिस से कांस्टेबल, हेड कांस्टेबल और दारोगा स्वेच्छा से जीआरपी में स्थानांतरण करा लेते है।
ऐसे में उनकी नियुक्ति की अवधि और सिविल पुलिस में वापसी की स्पष्ट पालिसी नहीं थी, जिससे भ्रष्टाचार की शिकायतें बढ़ रही थी।
काफी समय से जीआरपी में स्थानांतरित करने के बजाए पुलिस कर्मियों को एक साल के लिए संबद्ध किया जा रहा था, ताकि उनकी वापसी में किसी तरह की दिक्कत न आए। पुलिस मुख्यालय ने गहन मंथन के बाद जीआरपी की नियुक्ति पालिसी जारी कर दी। इससे कई सौ पुलिसकर्मी लाभान्वित होंगे।
जीआरपी में अब छह साल से ज्यादा की तैनाती नहीं रहेगी। वैसे नियुक्ति तो चार साल की होगी, लेकिन उसके काम और अधिकारियों की संस्तुति पर उसका दो साल का कार्यकाल और बढ़ाया जा सकता है। यह पॉलिसी कर्मचारियों को विश्वास में लेकर तैयार की गई है, ताकि उनके सामने किसी तरह की दिक्कत न आए।
- अशोक कुमार, अपर पुलिस महानिदेशक प्रशासन