उत्तराखंड में स्थापित सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) की ग्रोथ के लिए सिंगापुर यूनिवर्सिटी रोड मैप बनाएगी। इसके लिए यूनिवर्सिटी की छह सदस्यीय टीम के माध्यम से 1200 उद्योगों का सर्वे किया जा रहा है। इससे एमएसएमई उद्योगों के सामने चुनौती और समस्याओं पर डाटा बनेगा। इससे यह फायदा होगा कि प्रदेश सरकार भी उद्योगों की सहायता करेगी और विदेशी कंपनियां भी एमएसएमई उद्योगों को वेंडर बना सकेंगी।
प्रदेश सरकार ने सर्वे के लिए आठ सेक्टर चयनित किए हैं। इसमें फूड प्रोसेसिंग, फार्मा एवं कास्मेटिक, आटो मोबाइल, पैकेजिंग, सर्विस सेक्टर, टैक्सटाइल, इलेक्ट्रिक एंड इलेक्ट्रिॉनिक और रबड़ उद्योग शामिल हैं। इन सेक्टर के यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों ने श्रमिकों व कर्मचारियों का कौशल विकास, सुविधाएं, आईटी तकनीक, उत्पाद का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्राडिंग का तरीका, बार कोड, वित्तीय प्रबंधन, पर्यावरण, सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ उद्योगों की समस्याओं के संबंध में 125 सवाल तैयार किए हैं। यूनिवर्सिटी सर्वे के आधार पर एमएसएमई उद्योगों की ग्रोथ का रोड मैप तैयार कर प्रदेश सरकार को सौंपेगी। यूनिवर्सिटी की टीम लीडर सुमेधा गुप्ता ने बताया कि सर्वे का उद्देश्य एमएसएमई उद्योगों की समस्याओं और चुनौतियों का विश्लेषण कर समाधान का रास्ता ढूंढना है।
एमएसएमई उद्योगों में निवेश कम रोजगार ज्यादा
एमएसएमई उद्योगों में कम निवेश के बावजूद भी ज्यादा लोगों को रोजगार मिला है। राज्य गठन के बाद प्रदेश में अब तक एमएसएमई क्षेत्र में 60 हजार उद्योग स्थापित हैं। इसमें 11 हजार 600 करोड़ से अधिक निवेश हुआ और करीब तीन लाख लोगों को रोजगार मिला है।
इन क्षेत्रों में हो चुका सर्वे
देहरादून, हरिद्वार, कोटद्वार, हल्द्वानी में सर्वे हो चुका है। ऊधमसिंह नगर के रुद्र्रपुर में सोमवार को सिंगापुर यूनिवर्सिटी की टीम सर्वे करेगी।
सर्वे के माध्यम से प्रदेश में पहली बार एमएसएमई उद्योगों की ग्रोथ के लिए डाटा तैयार किया जाएगा। यूएसए, वियतनाम, मलेशिया, ताइवान समेत कई यूरोपीय देशों की बहुराष्ट्रीय कंपनियों को वेंडरों के रूप में एमएसएमई उद्योगों की जरूरत है। जो उनके लिए उत्पाद तैयार कर सकेे।
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सुधीर चंद्र नौटियाल, निदेशक, उद्योग विभाग