राजधानी देहरादून साइबर ठगी की घटनाओं का यू ही हॉट स्पॉट नहीं बन रहा है। देहरादून से साइबर ठगों को सिम और बैंक खाते उपलब्ध कराए जा रहे हैं। पुलिस जांच में इसका खुलासा हुआ है। साइबर अपराधियों को सिम उपलब्ध कराने के मामले में दो टेलीकॉम एजेंटों के खिलाफ अलग-अलग थाना क्षेत्रों में प्राथमिकी दर्ज की गई है। वहीं साइबर ठगी में इस्तेमाल किए गए म्यूल बैंक खातों के खिलाफ विभिन्न थाना क्षेत्रों में 17 प्राथमिकी दर्ज हो चुकी हैं। इसके अलावा साइबर ठगी के 14 और पीड़ित सामने आए हैं। उनकी शिकायतों के आधार पर भी पुलिस ने मामले दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
कोतवाली नगर पुलिस ने चकराता रोड स्थित रवि टेलीकॉम से जुड़े एक टेलीकॉम एजेंट कोड के साइबर ठगी में इस्तेमाल होने का मामला सामने आने पर प्राथमिकी दर्ज की है। साइबर अपराध से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियों की जांच के दौरान इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर के डिजिटल प्लेटफॉर्म से प्राप्त डाटा का सत्यापन किया गया। इसमें कोतवाली नगर क्षेत्र से जुड़ा संदिग्ध आईओएस एजेंट कोड सामने आया। यह कोड मोहम्मद आमिर के नाम से रवि टेलीकॉम, चकराता रोड, शिव मंदिर के पास, पार्क रोड, लक्ष्मण चौक के पते से जुड़ा बताया गया है।
जांच में इस एजेंट कोड से जारी मोबाइल नंबरों के खिलाफ देश के अलग-अलग राज्यों में साइबर धोखाधड़ी की शिकायतें मिलीं। एक नंबर के खिलाफ तमिलनाडु में 6,650 रुपये की ठगी की शिकायत मिली। दूसरे नंबर से गुजरात में 1,500 रुपये और महाराष्ट्र में 21 हजार रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया। तीसरे नंबर के खिलाफ दिल्ली और जम्मू-कश्मीर में भी साइबर अपराध की शिकायतें दर्ज मिलीं। पुलिस को आशंका है कि इन सिम का इस्तेमाल साइबर अपराधियों ने लोगों को ठगने के लिए किया।
इसी तरह बसंत विहार थाना पुलिस ने बल्लूपुर रोड स्थित रिलायंस रिटेल लिमिटेड के पीओएस एजेंट के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है। पुलिस को साइबर क्राइम सेल से मिली रिपोर्ट में डीडी-1, अंबिका कॉम्प्लेक्स स्थित पीओएस एजेंट कोड-6414 की भूमिका संदिग्ध मिली। इस एजेंट के माध्यम से जारी कई सिम नंबर देश के विभिन्न राज्यों में साइबर ठगी से जुड़े पाए गए हैं।
जांच में एक सिम के खिलाफ उत्तराखंड में चार हजार रुपये की ठगी की शिकायत मिली, जबकि दूसरे नंबर से हरियाणा के महेंद्रगढ़ और गुरुग्राम, राजस्थान के झुंझुनूं, पश्चिम बंगाल के बैरकपुर समेत कई स्थानों पर शिकायतें मिलीं। कुछ मामलों में ठगी की रकम 11 हजार से लेकर 1.24 लाख रुपये तक है। इंदौर, गोंदिया, द्वारका, निर्मल, चंडीगढ़ और ऊधमसिंह नगर से भी संबंधित सिम के खिलाफ शिकायतें मिली हैं। दिल्ली के द्वारका में दो मामलों में 1.24-1.24 लाख रुपये की ठगी की शिकायत दर्ज है। पुलिस अब दोनों मामलों में केवाईसी दस्तावेज, सिम जारी करने की प्रक्रिया, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, आईपी और डिवाइस से जुड़े विवरणों की जांच कर रही है। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि एजेंटों ने सिम जारी करते समय नियमों का पालन किया था या जानबूझकर साइबर अपराधियों तक मोबाइल कनेक्शन पहुंचाए। एसएसपी प्रमेंद्र सिंह डोबाल के मुताबिक साइबर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण के लिए दून पुलिस वृहद स्तर पर काम कर रही है। इसी के तहत जांच कर लगातार म्यूल अकाउंट, सिम उपलब्ध कराने वाले और साइबर ठगी में संलिप्त लोगों के खिलाफ मामले पंजीकृत किए जा रहे हैं।
म्यूल खातों से जुड़े 17 मुकदमे
साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल किए गए बैंक खातों की जांच में भी दून पुलिस को महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। म्यूल खातों के खिलाफ अलग-अलग थाना क्षेत्रों में 17 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। इन खातों में साइबर ठगी की रकम पहुंचने के बाद उसे दूसरे खातों में ट्रांसफर करने या एटीएम और अन्य माध्यमों से निकालने की बात सामने आई है। सबसे अधिक पांच-पांच मामले पटेलनगर और नेहरू कॉलोनी थाने में दर्ज हुए हैं। इसके अलावा प्रेमनगर, राजपुर में दो-दो मामले, कोतवाली, रायपुर और बसंत विहार थाने में एक-एक मामला दर्ज हुआ है। पुलिस खाताधारकों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
14 और पीड़ित आए सामने
साइबर ठगी से जुड़े मामलों की जांच आगे बढ़ने के साथ 14 और पीड़ित पुलिस के सामने आए हैं। इन लोगों ने साइबर ठगी की शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर संबंधित थाना क्षेत्रों में मामले दर्ज किए गए हैं। साइबर ठगी के मामले डालनवाला, पटेलनगर, नेहरू कॉलोनी और रायपुर थाना क्षेत्र में सामने आए। पुलिस अब इन मामलों में इस्तेमाल मोबाइल नंबर, सिम, बैंक खाते और डिजिटल लेनदेन की कड़ियों को जोड़कर पूरे नेटवर्क तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।