बृजेश के पिता दलवीर सिंह भी कुमाऊं रेजीमेंट केंद्र की सातवीं बटालियन में तैनात थे। 2004 में सेवानिवृत्त हुए दलवीर को सेना मेडल से भी नवाजा गया है। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने ताड़ीखेत में भवन बना लिया और पूरा परिवार अब यहीं रहता है। जवान बेटे की मौत ने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया है। बृजेश के निधन से उनके ताऊ सुरेंद्र सिंह रौतेला भी बेहद गमगीन दिखे। (संवाद)
कल पार्थिव शरीर पहुंचने की संभावना
पूर्व सैनिक दलवीर सिंह ने बताया कि बेटे के शहीद होने की सूचना उन्हें बुधवार की देर शाम को मिली। कहा कि शहीद का पार्थिव शरीर तीन जुलाई तक पहुंचने की संभावना है। विधायक करन माहरा, ब्लॉक प्रमुख हीरा रावत, रचना रावत, जिला पंचायत सदस्य धन सिंह रावत, डा. प्रमोद नैनवाल, त्रिभुवन फर्त्याल, हेमंत रौतेला आदि ने परिवार के प्रति गहरी संवेदना जताई है।
आखिरी बार भी नहीं सुन पाई बेटे की आवाज
सिपाही बृजेश रौतेला के शहीद होने से उनके घर पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। माता पुष्पा रौतेला बेसुध हैं। वह उस घड़ी को कोस रही हैं जब मंगलवार शाम बृजेश का फोन आया था और वह पानी लेने गई थीं। अपने जिगर के टुकड़े से आखिरी बार बात न कर पाने पर वह नियति को कोस-कोस कर बेहोश हो रही हैं।