नैनीताल हाईकोर्ट ने एसआई शारीरिक परीक्षा को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट के भीतर दरोगा भर्ती की शारीरिक परीक्षा से संबंधित सीडी दिखाई गई, जिसमें किसी प्रकार की अनियमितता नहीं पाई गई।
हाईकोर्ट के इतिहास में पहली बार साक्ष्य के तौर पेश की गई वीडियो रिकार्डिंग की सीडी प्रोजेक्टर के जरिए देखी गई। उसके बाद याचिका निरस्त कर दी गई। न्यायमूर्ति सर्वेश कुमार गुप्ता की एकलपीठ के समक्ष शुक्रवार को मामले की सुनवाई हुई।
रण विजय व अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दिसंबर 2014 में हुई एसआई शारीरिक परीक्षा को चुनौती दी थी। जिसमें कहा गया था कि दरोगा भर्ती में काफी धांधली हुई थी। बताया गया कि स्वयं विभाग द्वारा पारदर्शिता के लिए भर्ती की वीडियो रिकार्डिंग कराई गई थी।
याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि कुछ अभ्यर्थियों को बॉल फेंकने, चिनअप, लंबी कूद, हैंड स्ट्रैच आदि में मदद की गई थी, जो कि गलत है।
कोर्ट के भीतर साक्ष्य के रूप में सीडी देखने के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने कहा कि याची दिनकर सिंह शारीरिक परीक्षा ही उत्तीर्ण नहीं कर पाया और उसी ने सीडी सूचना के अधिकार के तहत 6 जनवरी 2015 को प्राप्त कर ली थी तथा अन्य चार याचिकाकर्ता लिखित परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर पाए, जबकि लिखित परीक्षा 6 फरवरी 2015 को संपन्न हो गई थी।
सीडी देखने के बाद कोर्ट ने कहा शारीरिक परीक्षा में किसी प्रकार की अनियमितता नहीं हुई है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में इतनी देरी से डाली गई याचिका उचित नहीं है। इन आधारों पर अर्जी खारिज दी गई।