पुलिस थाने की जीडी में कूट रचित तरीके से बदलाव करने व फर्जी मुकदमा कायम करने के आरोप में हरिद्वार जनपद के श्यामपुर थानाध्यक्ष को सस्पेंड कर दिया गया है।
इस मामले में डीजीपी ने साइलेंटली थाना पुलिस की घेराबंदी की। अब पूरे प्रकरण की जांच एसपी देहात देहरादून को दे दी गई है। अवैध खनन को लेकर हरिद्वार का श्यामपुर थाना खूब बदनाम है।
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कप्तान का सबसे चहेता पुलिसवाला
सूत्र बताते हैं कि इस थाने पर कप्तान का सबसे चहेता पुलिसवाला थानाध्यक्ष तैनात रहता है। पीएचक्यू का दबाव पड़ने के बाद विगत छह अक्टूबर को क्षेत्र में खनन करने वाली बड़ी मशीनें पुलिस ने पकड़ी। लेकिन कार्रवाई नहीं की।
जब फिर दबाव पड़ा तो नौं अक्टूबर को मुकदमा कायम हुआ। इसी मामसे में पुलिसकर्मियों पर हमला होना भी दिखाया गया। डीजीपी बीएस सिद्धू ने विगत शनिवार को अभियुक्तों को पकड़ने के लिए 72 घंटे का अल्टीमेटम दिया तो पुलिस ने मजदूरों को पकड़ लिया और कहा कि जो नामजद हैं उनका नाम जल्दबाजी में गलती जोड़ा गया।
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नामजद लोगों की जानकारी
अब यह खेल पीएचक्यू की समझ में आ गया। पुलिस पर हमला करने वाले नामजद लोगों की जानकारी पुलिस पहले ही जुटा जुकी थी। पुलिस ने जिस दिन वारदात दिखाई उस दिन दोनों नामजद लोग दिल्ली में थे।
डीजीपी का माथा ठनका तो उन्होंने पूरा मामला आईजी लॉ एंड ऑर्डर राम सिंह मीणा को सौंप दिया। इसी क्रम में पीएचक्यू में तैनात एडिशनल एसपी ममता बोरा को थाने पर जाकर जीडी चैक करने को कहा। सोमवार को टीम केसाथ थाना श्यामपुर पहुंची ममता बोरा ने जीडी में हुई ओवरराइटिंग देखी।
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सिपाहियों पर हमला दिखाया गया
यानी जिन दो सिपाहियों पर हमला दिखाया गया उनका नाम बाद में जोड़ा गया। मंगलवार को दोनों सिपाहियों को आईजी राम सिंह मीणा के सामने पेश किया गया। दोनों ने ही कहा कि वें गश्त पर तो थे लेकिन उनके ऊपर कोई हमला नहीं हुआ।
रिपोर्ट मिलते ही डीजीपी बीएस सिद्धू ने थानाध्यक्ष श्यामपुर हरपाल सिंह को तत्काल प्रभाव से मुअत्तल कर दिया और पूरे मामले की जांच देहरादून के एसपी देहात को सौंप दी।