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श्राद्ध 2018: पितृपक्ष का खास दिन आज, श्रद्धालु ध्यान रखें यह जरूरी बात

Wed, 03 Oct 2018 11:08 AM IST
कौशल सिखौला, अमर उजाला, हरिद्वार
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मातृ नवमी ऐसी तिथि है, जिस पर देश के अनेक भागों में माता का श्राद्ध करने की परम्परा है। जिन श्रद्धालुओं को माता की मृत्यु तिथि ज्ञात न हो वे माता का श्राद्ध आज कर सकते हैं।

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इसी दिन मातामही, दादी, पड़दादी आदि का श्राद्ध भी किया जा सकता है। पति के रहते जिन स्त्रियों की मृत्यु हो जाती है, उनका श्राद्ध भी मातृ नवमी पर किया जाता है।

इस बार चतुर्दशी और अमावस्या के श्राद्ध एक ही दिन होंगे। अमावस्या तिथि दो दिन पड़ेगी।        

यह परम्परा हरिद्वार के अलावा देश में भी प्रचलित

मातृ नवमी में माता का श्राद्ध करने की परम्परा है। यह परम्परा हरिद्वार के अलावा देश में भी प्रचलित है। गुजरात सिद्धपुर पाटन में देश भर से लाखों श्रद्धालु इसी दिन मातृ श्राद्ध करने जाते हैं। 

यूं तो जिस तिथि पर माता की मृत्यु हुई हो उसी तिथि पर श्राद्ध किया जाता है। लेकिन पर्वतीय अंचलों में तिथि के बजाए मातृ नवमी का दिन अधिक पवित्र माना जाता है।

इस दिन सौभाग्यवती श्राद्ध भी होता है। बुधवार को मातृ नवमी पूरे दिन मौजूद रहेगी। तथापि माता अथवा मातृपक्ष का श्राद्ध करने के लिए दोपहर 12 बजे से दो बजे तक का समय नियत किया गया है। 
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इस बार अमावस्या तिथि आठ और नौ दोनों दिन

श्राद्ध पक्ष का समापन अमावस्या को होता है। इस बार अमावस्या तिथि आठ और नौ दोनों दिन पड़ रही है। आठ अक्तूबर को चतुर्दशी का श्राद्ध है और उसी दिन अमावस्या का श्राद्ध भी हो जाएगा।

कारण यह है कि चतुर्दशी तिथि दोपहर 11.32 बजे तक मौजूद है और उसके बाद अमावस्या तिथि लग जाएगी। इस कारण चतुर्दशी और अमावस्या के दोनों श्राद्ध आठ अक्तूबर को हो जाएंगे।

सर्वपितृ श्राद्ध और पितृ विसर्जन भी इसी दिन होगा। नौ अक्तूबर मंगलवार को अमावस्या तिथि सवेरे के समय केवल 9.17 बजे तक मौजूद रहेगी। जो श्रद्धालु नाना-नानी का श्राद्ध करते हों, वे इस दिन श्राद्ध कर सकते हैं। स्नान के लिए भी यही दिन तय है। 
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