मातृ नवमी ऐसी तिथि है, जिस पर देश के अनेक भागों में माता का श्राद्ध करने की परम्परा है। जिन श्रद्धालुओं को माता की मृत्यु तिथि ज्ञात न हो वे माता का श्राद्ध आज कर सकते हैं।
इसी दिन मातामही, दादी, पड़दादी आदि का श्राद्ध भी किया जा सकता है। पति के रहते जिन स्त्रियों की मृत्यु हो जाती है, उनका श्राद्ध भी मातृ नवमी पर किया जाता है।
इस बार चतुर्दशी और अमावस्या के श्राद्ध एक ही दिन होंगे। अमावस्या तिथि दो दिन पड़ेगी।