पहाड़ पर शिक्षकों की कमी से राज्यपाल अजीज कुरैशी भी चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का 90 प्रतिशत भूभाग पर्वतीय है बावजूद पहाड़ पर शिक्षक हैं ही नहीं।
जरूरत के विपरीत चार सौ शिक्षक तैनात
वहीं मैदानों में जरूरत से ज्यादा शिक्षक हैं। शनिवार को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर राजभवन में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखंड पहाड़ी राज्य है।
70 प्रतिशत से अधिक आबादी आज भी पर्वतीय अंचलों में रहती है, बावजूद वहां शिक्षकों नहीं है। इसके उलट मैदानों में सौ शिक्षकों की जरूरत के विपरीत चार सौ शिक्षक तैनात हैं। यही हाल डॉक्टरों की है।
पहाड़ पर 50 डॉक्टरों की जगह दो डॉक्टर तैनात हैं। ऐसे में पहाड़ पर बच्चे सीखें तो क्या और रोगी जाएं तो कहां। राज्यपाल ने कहा कि पहाड़ के दूरदराज के क्षेत्र विकास से कोसों दूर हैं।
ऐसे में अगर वह कभी पहाड़ पर जाएं और कोई महिला या बच्चा उनसे पूछे कि आजादी के इतने साल बाद भी यह हाल क्यों है तो वह कोई जवाब नहीं दे सकेंगे।
पांच कमरों में नौ कक्षाएं, 400 छात्र
गोपेश्वर के राजकीय इंटर कॉलेज बूरा में नौ कक्षाओं के 400 विद्यार्थी पांच कमरों में पढ़ रहे हैं। भवन नहीं होने से एक क्लासरूम में एक से अधिक कक्षाएं चलाई जा रही हैं।
हाल यह है कि उप्र राजकीय निर्माण निगम निर्धारित अवधि पूरी होने के दो वर्ष बाद भी विद्यालय भवन का निर्माण पूरा नहीं कर सका है। जिसके कारण छात्रों को लगातार परेशानी हो रही है।
एक माह से स्कूल में ताला, विभाग बेखबर
घनसाली की भिलंगना तहसील के सीमांत गांव पिंस्वाड़ जूनियर हाई स्कूल में एक माह से ताला लटका है। यह स्कूल सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे चल रहा था, जबकि यहां 83 छात्र अध्ययनरत हैं।
यही नहीं एक महीने से वह शिक्षक भी गायब चल रहे हैं। ऐसे में जबकि परीक्षाएं नजदीक आ गई हैं।
शिक्षक तीन दिन से गायब, पढ़ाई चौपट
चमोली जिले के पोखरी विकासखंड के कुजासू गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय तीन दिनों से बंद चल रहा है।
यहां एक शिक्षक और एक शिक्षिका तैनात हैं। लेकिन शिक्षिका पांच माह से मातृत्व अवकाश पर हैं जबकि शिक्षक भी विद्यालय नहीं आ रहे हैं। छात्र रोज स्कूल आते हैं लेकिन ताल देखकर लौट जाते हैं।
सांसद, विधायक और अफसर बनकर ‘ऊंची जात’ हासिल कर चुके लोगों को पहाड़ और वहां रहने वाले लोगों का दर्द नजर नहीं आता।
- अजीज कुरैशी, राज्यपाल