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बुनियादी सुविधाओं का टोटा, लेकिन शराब परोसने की फुल फ्लैज तैयारी

Tue, 02 May 2017 05:50 PM IST
चंद्रशेखर जोशी/ अमर उजाला, चंपावत
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वाइन - फोटो : फाइल फोटो
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बाराकोट में लोगों को शराब तो मिल जाएगी, मगर बुनियादी सुविधाएं आज तक नहीं मिली। न डिग्री कॉलेज, न गैस वितरण केंद्र। और तो और आपात चिकित्सा सेवा 108 तक की सुविधा नहीं।
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उत्तराखंड के बाराकोट में देशी शराब की दुकान खोलने की कवायद शुरू कर दी गई है। गुमदेश के पुलहिंडोला (किमतोली) की शराब की दुकान को बाराकोट में शिफ्ट करने की तैयारी तकरीबन पूरी कर ली गई है।

पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा जिले से लगा बाराकोट तहसील और ब्लाक मुख्यालय है। लेकिन विकास में बाराकोट का ये इलाका चंपावत जिले से सबसे पिछड़ा है। करीब 43 हजार की आबादी वाले बाराकोट क्षेत्र में एक भी डिग्री कॉलेज नहीं है। उच्च शिक्षा के लिए यहां के लोग करीब 21 किलोमीटर दूर लोहाघाट जाने को मजबूर है।
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रसोई गैस सिलेंडर की रिफिलिंग की सुविधा भी नहीं

एलपीजी - फोटो : SELF
वहीं यहां के लोगों को रसोई गैस सिलेंडर की रिफिलिंग की सुविधा भी नहीं है। महीने में एक बार गाड़ी के जरिए सिलेंडर बंटते हैं। इस तिथि को छोड़ अन्य दिनों में यहां के लोग सिलेंडर के लिए लोहाघाट दौड़ लगा रहे हैं। जिसमें उन्हें करीब 100 रुपए अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है।

यहां की स्वास्थ्य सुविधाएं और भी बदतर है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एक्सरे तक की सुविधा नहीं है। इकलौते एलोपैथिक डॉक्टर के हवाले यहां की स्वास्थ्य व्यवस्था है। यहां की अकेली महिला चिकित्साधिकारी भी लोहाघाट संबद्ध हैं। यहां एक भी आपात चिकित्सा सेवा 108 नहीं है।

जनवरी 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री के आश्वासन के बावजूद अब तक 108 सेवा नहीं खुल सकी है। इमरजेंसी में यहां के लोगों के लिए 21 किमी दूर से आपात सेवा पहुंचती है। लंबे अर्से से यहां उप जिलाधिकारी का पद खाली है। एसडीएम का जिम्मा भी लोहाघाट के हवाले है। इसी तरह बारकोट ब्लाक के खंड विकास अधिकारी का जिम्मा भी कार्यवाहक अधिकारी के पास है।

पुलहिंडोला (किमतोली) की देशी शराब की दुकान को बाराकोट शिफ्ट करने का प्रस्ताव है। नियम के तहत जिले में एक जगह से दूसरी जगह शराब की दुकान शिफ्ट की जा सकती है। जिलाधिकारी की अनुमति मिलने के बाद इसे खोल दिया जाएगा।
- दीपाली साह, जिला आबकारी अधिकारी, चंपावत
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