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केरोसिन से जुड़ी इस खबर ने मचाई खलबली, पेट्रोलियम मंत्री के खत ने खोले कई राज

Wed, 06 Dec 2017 08:22 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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मिट्टी के तेल - फोटो : demo pic
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केरोसिन के बारे में ये खबर पढ़कर आपके होश उड़ जाएंगे। शासन में तो खलबली मच गई है, लेकिन अब आप भी इसे पढ़ने के बाद हैरान हो जाएंगे।
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केंद्र सरकार की ओर से प्रदेश को दिए जा रहे करीब ढाई करोड़ लीटर केरोसिन में से एक करोड़ लीटर से ज्यादा केरोसिन वास्तविक उपभोक्ताओं तक पहुंच ही नहीं रहा है। राज्य सरकार की ओर से केरोसिन का कोटा बढ़ाए जाने की मांग पर  केंद्रीय पेट्रोलियम राज्यमंत्री धर्मेंद्र प्रधान के  उत्तराखंड सरकार को भेजे पत्र ने यह सच बेपर्दा कर दिया है। जानकार कहते हैं कि केरोसिन की यह मोटी मात्रा वास्तविक उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंच रही तो जाहिर है कि इसकी कालाबाजारी हो रही होगी।

मिलावट आदि कामों मे इसका इस्तेमाल करके मोटा मुनाफा कमाया जा रहा होगा। तय है कि यह सुनियोजित धंधा जिम्मेदार अधिकारियों की सरपस्ती के बिना संभव नहीं है।
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 बीते दिनों केंद्र सरकार से केरोसिन की कमी होने की बात कहते हुए राज्य का कोटा बढ़ाए जाने की बात कही गई थी। इसके जवाब में केंद्रीय पेट्रोलियम राज्यमंत्री धर्मेंद्र प्रधान का एक पत्र राज्य सरकार को हाल ही मिला है। इसमें जो तथ्य दिए हैं, वे हैरान करने वाले हैं।

कहा गया है कि उत्तराखंड को दिए जाने वाले कुल कोटे में से लगभग 44 फीसदी केरोसिन उन परिवारों को उपलब्ध ही नहीं हो रहा है, जिन्हें इसे आवंटित किए जाने की व्यवस्था है। प्रधान के पत्र का निहितार्थ निकाले तो राज्य में प्रति वर्ष एक करोड़ लीटर केरोसिन का गोलमाल कर इसे अन्य कार्यों में इस्तेमाल किया जा रहा है।  

जानकारी के मुताबिक उत्तराखंड के उन राशन कार्ड धारकों को केरोसिन वितरित किए जाने की व्यवस्था है, जिनके पास घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) का कनेक्शन नहीं है। पर्वतीय क्षेत्र में दो लीटर प्रति कार्ड और मैदानी क्षेत्र में एक लीटर प्रति कार्ड के हिसाब से तेल दिया जाता है।

हकीकत सामने आने के बाद से केरोसिन वितरण से जुड़े सिस्टम में खलबली

प्रदेश में केरोसिन का मासिक कोटा करीब 2061 किलो लीटर, यानी सालाना 2,47,32000 लीटर है। प्रदेश के कोटे से राज्य के विभिन्न जनपदों से आने वाली मांग के आधार पर केरोसिन उपलब्ध कराया जाता है। यह हकीकत सामने आने के बाद से केरोसिन वितरण से जुड़े सिस्टम में खलबली मची हुई है। शासन को अब प्रत्येक कार्डधारक का सत्यापन की सुध आई है।

गौरतलब है कि  केंद्र के निर्देश पर शासन ने सभी जिलाधिकारियों से पात्र लाभार्थियों की सूची उपलब्ध कराने कहा था, लेकिन अभी तक किसी भी जनपद से सूचना नहीं आई है। शासन की ओर से इस संबंध में 10 नवंबर, 2017 को निर्देश जारी किए थे।

ब्लैक में 30 से 35 रुपये लीटर बिकता है केरोसिन
पात्र लाभार्थियों को उपलब्ध नहीं कराए जाने वाले केरोसिन की कालाबाजारी की जा रही है। बताया जाता है कि ब्लैक में केरोसिन की बिक्री 35 से 40 रुपये प्रति लीटर की दर पर हो जाती है। एक लीटर केरोसिन की कालाबाजारी पर 10 से 15 रुपये का हेरफेर किया जा रहा है। इस हिसाब से हर साल करोड़ों का खेल खेला जा रहा है।

हर 15 दिन पर 25 पैसे बढ़ जाता है रेट
केंद्र सरकार केरोसिन पर दी जाने वाली सब्सिडी में लगातार कटौती कर रही है। हर पंद्रह दिन पर केरोसिन के रेट में 25 पैसे प्रति लीटर का इजाफा हो जाता है। वर्तमान में मैदानी क्षेत्रों में केरोसिन 23.75 रुपये प्रति लीटर के दर पर उपलब्ध है। वहीं पर्वतीय जनपदों में लाभार्थियों को लगभग 25 रुपये (ढुलाई खर्च जोड़कर) प्रति लीटर की दर से केरोसिन उपलब्ध कराया जा रहा है।

 
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प्रदेश में केरोसिन का 2061 किलो लीटर का है मासिक कोटा

LPG Gas Cylinder
-मैदानी जनपदों के लाभार्थियों को एक लीटर प्रति कार्ड के हिसाब से मिलता है केरोसिन।
-पर्वतीय जनपदों के लाभार्थियों को दो लीटर प्रति कार्ड के हिसाब से मिलता है केरोसिन।
-घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) का कनेक्शन होने की स्थिति में नहीं मिलता है केरोसिन।

पेट्रोलियम मंत्रालय से आए पत्र से इस गड़बड़ी का जानकारी मिली है। सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पात्र लाभार्थियों को ही केरोसिन तेल का वितरण सुनिश्चित की जाए। इसका डायवर्जन किसी भी स्थिति में नहीं होना चाहिए।
 -आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले
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