श्रीनगर स्थित कमलेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव की तीन घंटे तक निर्बाध रूप से पूजा का आयोजन किया गया। घृतकमल पूजा के आयोजन में 36 व्यंजन, 52 भोग लगाने के साथ ही शिवलिंग पर 81 किग्रा घी का लेप किया गया।
माघ माह की अचला सप्तमी पर आयोजित होने वाली घृतकमल पूजा का आयोजन परंपरानुसार शिव की आवरण पूजा के साथ हुआ।
पूजा का है पौराणिक महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार, तारकासुर ने जब ब्रह्मा से शिव पुत्र के हाथों ही मारे जाने का वरदान लिया, तो सभी देवताओं ने मिलकर भगवान शिव को पार्वती के साथ विवाह के लिए इसी तरह पूजा-अर्चना की थी। देवताओं की ओर से यही पूजा कमलेश्वर महादेव मंदिर में महंत करते हैं।
लेटकर करते हैं परिक्रमा
रात 12 बजे पूजा संपन्न होने के बाद महंत आशुतोष पुरी ने दिगंबर स्वरूप में कमलेश्वर महादेव मंदिर के चारों ओर लेटकर परिक्रमा संपन्न की।
भगवान को चढ़ाए गए भोग को सभी भक्तों में वितरित किया गया। शुक्रवार सुबह से भी शिव पर लेप किए गए घी का प्रसाद लेने के लिए भक्तों का तांता लगा रहा।
उत्तर भारत में यहीं होती है यह पूजा
भगवान कमलेश्वर के मंदिर में अचला सप्तमी पर होने वाली घृतकमल पूजा पूरे उत्तर भारत में कमलेश्वर महादेव मंदिर में ही होती है। महंत आशुतोष पुरी ने बताया कि पूजा के लिए दूर-दूर से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं।
हालांकि इस वर्ष अन्य वर्षों की अपेक्षा कम श्रद्धालु पहुंचे। उन्होंने कहा कि बैकुंठ चतुर्दशी पर इतनी बड़ी पूजा का समय नहीं मिल पाता। इसलिए भी यह आयोजन हर वर्ष परंपरानुसार किया जाता है।