मंदिर में देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते
संत गलत कार्य करने वालों को फटकार लगाने के साथ ही उन्हें आर्थिक व शारीरिक दंड की चेतावनी भी देते थे। क्षेत्र के लोग इन संत को शिवांश मानते थे। इस पूरे क्षेत्र में संत का बहुत प्रभाव था। संत की फटकार के चलते ही इस स्थान का नाम ताड़केश्वर पड़ा।
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मंदिर के मुख्य पुजारी संदीप सकलानी का कहना है कि ताड़केश्वर का मंदिर अति प्राचीन है। मंदिर में देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं व यहां की रमणीक छटा को देख मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। माघ व श्रावण मास में मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है, हालांकि वर्ष भर श्रद्धालु मंदिर में पहुंचकर भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक करते हैं।