इलाज में लापरवाही बरतने से हुई नेपाली मूल के छात्र की मौत के मामले में आरोपी शेरवुड कॉलेज के प्रधानाचार्य अमनदीप संधू, वार्डन रवि कुमार और सिस्टर पायल पाल ने हाईकोर्ट के निर्देश पर शनिवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एनएस राणा की अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। बाद में अदालत ने उन्हें 20-20 हजार रुपये के निजी मुचलकों पर जमानत दे दी।
नैनीताल के प्रतिष्ठित आवासीय विद्यालय शेरवुड कॉलेज में अध्ययनरत नेपाली मूल के छात्र शान प्रजापति की नवंबर 2014 में मौत हो गई थी। मामले में शान की मां ने तल्लीताल थाने में तहरीर देकर बेटे की मौत के लिए कॉलेज के प्रधानाचार्य अमनदीप संधू, वार्डन रवि कुमार और सिस्टर पायल पाल को जिम्मेदार ठहराते हुए इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया था।
तीनों के खिलाफ तल्लीताल पुलिस ने आईपीसी की धारा 304 ए के तहत मुकदमा दर्ज किया था। मामले में जांच के बाद पुलिस ने 16 फरवरी को सीजेएम कोर्ट नैनीताल में चार्जशीट दाखिल की। इस चार्जशीट को निरस्त करने की मांग को लेकर आरोपी प्रधानाचार्य, वार्डन और सिस्टर ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
लेकिन हाईकोर्ट ने उक्त याचिका को निरस्त करते हुए प्रधानचार्य अमनदीप संधू, वार्डन रवि कुमार और सिस्टर पायल पाल को निचली अदालत में आत्मसमर्पण करने के निर्देश दिए थे।
हाईकोर्ट के निर्देश पर शनिवार को तीनों ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एनएस राणा की अदालत में आत्मसमर्पण करते हुए जमानत अर्जी दाखिल की।
जमानत अर्जी पर हुई सुनवाई के बाद अदालत ने तीनों को 20-20 हजार के निजी मुचलके के आधार पर जमानत दे दी। हालांकि, इन तीनों के खिलाफ आईपीसी की धारा 304ए के तहत अदालत में कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।