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हरिद्वार की बेटी को अमेरिकी राष्ट्रपति ने दिया अहम पद

Thu, 05 Jun 2014 02:52 PM IST
एजेंसी/ वॉशिंगटन
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अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने हरिद्वार में जन्मीं जानी-मानी भारतीय अमेरिकी फंड राइजर (चंदा जुटाने वाली) शेफाली राजदान दुग्गल को यूएस होलोकॉस्ट मेमोरियल काउंसिल का सदस्य नियुक्त किया है।
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कैलिफोर्निया की रहने वाली दुग्गल ने 2008 और 2012 में राष्ट्रपति चुनाव के दौरान ओबामा के प्रचार अभियान के लिए लाखों डॉलर का चंदा जुटाया था।

शेफाली हरिद्वार में पैदा हुईं और 1973 में दो साल की उम्र में वह अपने माता-पिता के साथ अमेरिका के पेंसिलवेनिया चली गई थीं। अन्य दूतावासों और प्रशासनिक पदों के साथ ओबामा ने शेफाली की नियुक्ति की घोषणा मंगलवार को की।
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ओबामा ने जताया शैफाली का आभार

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, ‘इन महिलाओं और पुरुषों के असाधारण समर्पण ने इन्हें अमेरिकी लोगों की सेवा का मौका दिया है।

मैं बहुत आभारी हूं कि उन्होंने इस प्रशासन में काम करने की सहमति जताई। मैं आने वाले वक्त में उनके साथ काम करने को लेकर उत्सुक हूं।

मालूम हो कि यूएस होलोकॉस्ट मेमोरियल काउंसिल की स्थापना अमेरिकी संसद की ओर से 1980 में की गई थी ताकि यूएस होलोकॉस्ट स्मृति संग्रहालय के निर्माण के लिए धनराशि एकत्रित की जा सके।

हर साल बदले जाते हैं 11 सदस्य

काउंसिल की एक वर्ष में दो बार बैठक होती है। काउंसिल में राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त कुल 55 सदस्य होते हैं, इसके अलावा पांच-पांच सदस्य सीनेट तथा प्रतिनिधि सभा के होते हैं।

तीन अन्य सदस्य शिक्षा, गृह और विदेश मंत्रालय के होते हैं। राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त सदस्य का कार्यकाल पांच साल का होता है।

काउंसिल से हर साल कुल 11 सदस्य बदले जाते हैं। राजदान के पास इसके अलावा और भी कई पद हैं।

कई अहम पदों पर किया काम

यूएस होलोकॉस्ट मेमोरियल काउंसिल की सदस्य नियुक्त होने से पहले भी शेफाली कई अहम पदों पर काम कर चुकी हैं।

वह डेमोक्रेटिक नेशनल कमेटी (डीएनसी), नेशनल फाइनेंस कमेटी तथा डीनएसी वूमेन लीडरशिप फोरम की सह अध्यक्ष भी हैं।

उनके पास कई वित्तीय और राजनीतिक पदों पर काम करने का अनुभव है। उन्होंने मियामी विश्वविद्यालय से बीएससी की डिग्री हासिल की है।

न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय से परास्नातक की डिग्री हासिल की है। वह डेमोक्रेटिक पार्टी से अमेरिकी राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी अलगोर तथा पूर्व अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन के लिए भी चंदा जुटा चुकी हैं।
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रोचक है पिता के अमेरिका जाने की कहानी

शेफाली बताती हैं कि उनके पिता के अमेरिका बसने की कहानी काफी रोचक है। शेफाली के पिता एक बार फिल्म देख रहे थे।

फिल्म में उन्होंने अमेरिका के ओहियो राज्य में स्थित सिनसिनाती शहर के फाउंटेन स्क्वॉयर की खूबसूरत तस्वीर देखी और तभी से उन्होंने अमेरिका जाने का फैसला कर लिया।
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