उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के बीच परिसंपत्तियों के बंटवारे को लेकर 13813.43 हेक्टेयर भूमि के मामले में राज्य गठन के 16 साल बाद भी 25 फीसदी भूमि हस्तांतरण से आगे बात नहीं बढ़ पाई है।
यूपी अपने स्वामित्व वाली उत्तराखंड में मौजूद भूमि का मात्र 25 फीसदी क्षेत्रफल देने को तैयार है। हालांकि सिंचाई विभाग की यूपी के स्वामित्व वाली 41 नहरें और 2213 भवनों को उत्तराखंड को हस्तांतरित करने की सहमति बन चुकी है।
दोनों प्रदेशों के उच्चाधिकारियों की कई दौर की बैठकों के बाद आज हरिद्वार में सिंचाई विभाग के अफसरों की बैठक से अब कुछ आस है। दोनो प्रदेशों के अधिकारी सहमति के बाद मौके पर जाकर साइट का सत्यापन करेंगे। नैनीताल हाईकोर्ट ने सोमवार को परिसंपत्तियों के बंटवारे के संबंध में दायर एक जनहित याचिका पर जल्द से जल्द बंटवारे के निर्देश दिए थे।
दरअसल, उत्तराखंड में यूपी के स्वामित्व वाली भूमि को लेकर दोनों प्रदेशों के बीच मामला सुलझ नहीं पा रहा है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि दोनों प्रदेशों के बीच वर्षों बाद भी इस प्रकरण के न सुलझ पाने से सैकड़ों हेक्टेयर भूमि, भवन और नहरों के किनारे अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है।
केवल हरिद्वार में ही कुंभ मेला क्षेत्र बैरागी कैंप और चंडीघाट के पास 60 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर कब्जे हो चुके हैं। इसके अलावा सुल्तानपुर, बहादराबाद, रुड़की आदि क्षेत्रों में इस भूमि पर कब्जे हैं। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक हरिद्वार में दो सौ से अधिक हेक्टेयर भूमि पर कब्जे हैं। अपर सचिव पुनर्गठन अतुल कुमार गुप्ता ने बताया कि परिसंपत्तियों के प्रकरण को सुलझाने के लिए विभागीय स्तरों पर बैठकें हो रही हैं।
पुनर्गठन विभाग के पास तब मामले आते हैं, जब प्रकरण दोनों प्रदेशों के बीच सुलझा लिए जाते हैं। प्रकरण को लेकर न सिर्फ वित्त, सिंचाई, पशुपालन, वन विभाग, परिवहन निगम, सहकारी संघ, ऊर्जा और पर्यटन सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों की विभागीय स्तर पर बल्कि मुख्य सचिव स्तर की भी कई बैठकें हो चुकी हैं।
पर्यटन विभाग के अंतर्गत हरिद्वार स्थित अलकनंदा होटल के स्वामित्व, पर्यटन और ऊर्जा विभाग के अंतर्गत आने वाली परिसंपत्तियों के हस्तांतरण का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।
शासन नहीं विभागीय स्तर पर हरिद्वार में दोनों प्रदेशों के अधिकारियों के बीच बैठक होनी है, 25 फीसदी भूमि के मामले में पूर्व में सहमति बन चुकी है।
- आंनद वर्द्धन, सचिव सिंचाई