शारदा पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य पद पर आसीन हुए स्वामी अच्युतानंद तीर्थ का शनिवार को अद्भुत मंदिर में अभिनंदन किया गया। संतों ने उन्हें माला पहनाकर और चादर ओढ़ाकर सम्मानित किया। अच्युतानंद ने विश्वास दिलाया कि वे सभी धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए सनातन धर्म को आगे बढ़ाएंगे।
संत समिति के संस्थापक सदस्य तंत्र विशारद स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती ने शंकराचार्य को अभिनंदन पत्र भेंट किया। भक्तों की ओर से सतीश चंद्र मिश्रा ने खड़ग भेंट कर राष्ट्र रक्षा के लिए आश्वासन मांगा। भक्तों ने शॉल ओढ़ाकर धर्म रक्षा व राष्ट्रभक्ति के लिए कार्य करने की कामना व्यक्त की। सुमेरु पीठाधीश्वर जगद्गुरुनरेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि राष्ट्र की एकता और अखंडता की रक्षा का पालन चारों शंकराचार्यों को करना चाहिए।
जो पीठ कर्तव्य पालन में असफल रही है, उस पर नए सिरे से काम शुरू किया जाएगा। जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर अर्जुन पुरी ने शंकराचार्य की नियुक्ति पर प्रसन्नता जताते हुए कहा कि हरिद्वार को यह गौरव प्राप्त हुआ है। दंडी स्वामी निगम बोध तीर्थ ने संस्कृत के साथ साथ संस्कृति को बचाने की आवश्यकता जताई।
स्वामी प्रेमानंद भारती ने कहा कि नव शंकराचार्य जगह जगह संस्कृत विद्यालयों की स्थापना कराएंगे। स्वामी विवेकानंद सरस्वती ने शंकराचार्य की नियुक्ति को धर्म सम्मत बताया। स्वामी सच्चिदानंद ने संत एकता के लिए कार्य करने पर बल दिया।
योगी सत्यव्रतानंद सरस्वती ने काशी विद्वत परिषद को इस कार्य को अंजाम देने के लिए साधुवाद दिया। महंत दामोदर प्रपन्नाचार्य ने कहा कि अब निश्चय ही विघटनकारी शक्तियों पर अंकुश लगेगा। इस अवसर पर प्रबोधानंद गिरी, कमल नयन पांडे, माधवानंद, विनोद गिरी, डा. चंद्रभूषण शुक्ल आदि ने भी विचार रखे।
शंकराचार्य स्वामी अच्युतानंद तीर्थ ने कहा कि वे विचलित हुए बगैर कार्य करेंगे और द्वारिका जाकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे। विद्वानों ने मंगल ध्वनि कर नव शंकराचार्य का अभिनंदन किया।