गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में गायत्री जयंती एवं गंगा दशहरा का पर्व समूह साधना, विश्व कल्याण की प्रार्थना एवं पौधरोपण को गति देने के संकल्प के साथ मनाया गया। साधकों ने अखंड जप में भाग लिया। गंगा दहशरा पर गायत्री परिवार की ओर से हरिद्वार समेत देश के विभिन्न स्थानों में एक लाख 64 हजार पौधे रोपे गए।
गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पंड्या ने कहा कि गायत्री साधक के विचारों को पवित्र करती हैं तो पतित पावनी गंगा अपने शरण आए लोगों को शुद्ध करती हैं। गायत्री व गंगा के तीन-तीन चरण हैं, जिसके अनुपालन से प्रगति दर प्रगति होती है। उन्होंने पतित पावनी गंगा एवं उसकी सहायक करीब 150 नदियों को प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में चल रहे गायत्री परिवार के कार्यों को गति देने के लिए प्रेरित किया।
डॉ. पंड्या ने कई औषधीय, फलदार एवं छायादार पौधों का पूजन कर इसे विस्तारित करने के लिए संकल्पित कराया। उन्होंने गुजरात, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और मप्र में चलाए जा रहे पौधरोपण के लिए नर्सरी विकसित करने के विभिन्न सुझाव दिए। संस्था की अधिष्ठात्री शैल दीदी ने कहा कि महापर्व जिम्मेदारी उठाने का है। सद्ज्ञान एवं सत्कर्म को जन-जन तक पहुंचाने का है। इससे पहले डॉ. पंड्या एवं शैल दीदी ने संपूर्ण गायत्री परिवार के प्रतिनिधि के रूप में पर्व पूजन किया और हजारों परिजनों को गायत्री महामंत्र से दीक्षित किया।