उन्होंने उत्तराखंड में तीर्थाटन के बजाय पर्यटन को बढ़ावा दिए जाने पर भी नाराजगी जाहिर की। देश में छोटी-छोटी बच्चियों के साथ बढ़ रहीं दुष्कर्म की घटनाओं को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि इसके लिए नशा जिम्मेदार है।
बेटियों को बचाना है तो इसके लिए नशे को उखाड़ फेंकना होगा। कहा कि भारत साधु समाज नशे के खिलाफ जल्द ही राष्ट्रव्यापी अभियान चलाएगा। बता दें कि स्वामी स्वरूपानंद ने मंगलवार को भी एक बयान दिया था जिसके बाद वे चर्चा में रहे। उन्होंने कहा था कि हिंदू धर्म ग्रंथों में उल्लेख है कि जो बेटियां माता-पिता का अंतिम संस्कार करती हैं। उनके माता-पिता को तृप्ति नहीं मिलती है।