शारदा एवं ज्योर्तिपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने इस्कान संस्था पर निशाना साधा है। उन्होंने वृंदावन, ऋषिकेश, मुंबई के बजाए आदिवासी क्षेत्रों में मंदिर बनाकर उनकी सेवा करने की सलाह दी। कहा कि यह संस्था अपने सिद्धांत से भटक गई है। अमेरिका में संचालित संस्था को अब देश से धन भेजा जा रहा है, जो कि गलत है।
कनखल स्थित मठ में अमर उजाला से बातचीत में शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि इस्कान संस्था विदेेशों में कृष्ण नाम का प्रचार करती है। उसका उद्देश्य प्रचार के दौरान मिली राशि गरीबों और पिछड़ों की सेवा में लगाना था। इस्कान का रजिस्ट्रेशन अमेरिका में है। वर्तमान में संस्था देश के मंदिरों से एकत्रित होने वाले धन को विदेशों में भेज रही है।
अब इसका नया समुदाय भी खड़ा करने का काम किया जा रहा है। इनके प्रचार करने का तरीका भी गीता के प्रचार के सिद्धांत के विपरीत है। इस्कान से जुड़े लोग जनता को भ्रमित करते हुए भगवान शिव की पूजा के बजाय केवल श्रीकृष्ण की पूजा करने की बात करते हैं, जोकि सनातन धर्म के खिलाफ है।
उन्होंने इस्कान की ओर से वृंदावन, ऋषिकेश, मुंबई में मंदिर बनाने का विरोध करते हुए कहा कि जहां पर पहले से ही भगवान श्रीकृष्ण के कई मंदिर हैं तो ऐसे स्थानों के बजाय आदिवासी क्षेत्रों में मंदिर बनाने चाहिए, ताकि पूजा अर्चना या चंदा के रूप में आए धन को गरीबों की सेवा में लगाया जाए।