फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

J&K को लेकर बोले शंकराचार्य, आबादी का संतुलन बनाओ सब ठीक हो जाएगा

Mon, 08 May 2017 10:58 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
विज्ञापन
Shankaracharya - फोटो : amarujala
विज्ञापन
जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि अयोध्या में रामलला का मंदिर बनाने का अधिकार सिर्फ और सिर्फ रामालय ट्रस्ट को है। सुप्रीम कोर्ट से जब भी कोई निर्णय आएगा, तब रामालय ट्रस्ट ही मंदिर का निर्माण कराएगा। जम्मू कश्मीर में हालात सामान्य करने के लिए उन्होंने सरकार को आबादी का संतुलन बनाने और धारा 370 हटाने का सुझाव दिया।     
विज्ञापन


कनखल स्थित शंकराचार्य मठ में बातचीत करते हुए अयोध्या मसले पर शंकराचार्य स्वरूपानंद ने कहा कि जो लोग कहते हैं कि बाबर और मीर बांकी ने राम मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई थी, वह गलत तथ्य पेश कर रहे हैं। हकीकत यह है कि अयोध्या में मस्जिद कभी थी ही नहीं। यह बात भी पूरी तरह पुष्ट हो चुकी है कि बाबर और मीर बांकी कभी अयोध्या आए ही नहीं। 

ऐसे में वहां मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाने का कोई सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि जो लोग मंदिर बनाने के लिए दोनों सदनों में विधेयक लाने और समर्थन जुटाने की बात कर रहे हैं, इसका वास्तविकता से कोई सरोकार नहीं है। राम मंदिर निर्माण के लिए कोई विधेयक लाने की जरूरत नहीं है। तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव के समय अधिग्रहीत की गई भूमि पर राम मंदिर का निर्माण बिना विधेयक के किया जा सकता है और रामालय ट्रस्ट इसे करके दिखाएगा। ट्रस्ट में खुद शंकराचार्य के साथ-साथ रामानंदाचार्य सहित अन्य संतगण शामिल हैं।
विज्ञापन


उन्होंने कहा कि एक बार जैन मुनि सुशील महाराज ने हिंदू और मुस्लिम पक्षकारों के बीच समझौता कराने का प्रयास किया था। इस बैठक में जो मुस्लिम विद्वान पहुंचे थे, उन्हें सभी तथ्य दिखाकर संतुष्ट करने का प्रयास किया गया था कि राम लला स्थल पर कभी मस्जिद नहीं रही, लेकिन जैसे ही बात समाधान की तरफ पहुंचने लगी कुछ हिंदू मत के लोगों ने ही विरोध करना शुरू कर दिया। उन्होंने यह कहते हुए वाकआउट कर दिया कि खुद शंकराचार्य हिंदुओं के मान्य प्रतिनिधि नहीं हैं और मुस्लिमों से उन्हें कोई बात नहीं करनी है। 
 
विज्ञापन

सम्मेलन के बजाय केस वापस कराएं    

शंकराचार्य ने कहा कि मंदिर का मुद्दा न्यायालय से बाहर सुलझ नहीं सकता। न्यायालय को शीघ्र फैसला सुनाना चाहिए, क्योंकि हकीकत यह है कि बिना न्यायालय के फैसले के वहां एक ईंट भी नहीं लगाई जा सकती। भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवानी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती जैसे नेताओं को ढांचा तोड़ने का दोषी ठहराने के मामले में शंकराचार्य ने कहा कि कोर्ट ने उन्हें मस्जिद तोड़ने का दोषी नहीं माना है, ढांचा तोड़ने का दोषी माना है। वहां मस्जिद नहीं मंदिर तोड़ा गया था। उन्होंने कहा कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद के तथ्य कभी नहीं रहे, इसके बावजूद लाल कृष्ण आडवानी ने रथयात्रा निकालकर ढांचे को बाबरी मस्जिद करार दिया।

उन्होंने कहा कि कश्मीर में हालात तभी सुधर सकते हैं जब वहां कुछ प्रभावी कदम उठाए जाएं। उन्होंने धारा 370 को संविधान का अंग नहीं बताते हुए इसे तत्काल हटाने की बात कही। दोहरी नागरिकता खत्म करने और विस्थापित कश्मीरी पंडितों को दोबारा बसाने अथवा उन्हें वोट का अधिकार देने की बात कही। बांग्लादेशियों को नागरिकता देने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि जब तक अपना घर सुरक्षित नहीं होगा तब तक पाकिस्तान से नहीं निपटा जा सकता।    

सम्मेलन के बजाय केस वापस कराएं    
राम मंदिर को लेकर जगद्गुरु शंकराचार्य के निशाने पर अप्रत्यक्ष रूप से आरएसएस और भाजपा रहे। पिरान कलियर में तीन दिन पहले आरएसएस की मुस्लिम शाखा के सम्मेलन में राम मंदिर निर्माण जैसे प्रस्ताव पारित करने को लेकर पूछे गए सवाल पर शंकराचार्य का कहना था कि सम्मेलन का आयोजन कर सिर्फ राजनीति की जा सकती है। मुस्लिम मंच को कुछ करना ही है तो सुन्नी सेंट्रल बोर्ड से सुप्रीम कोर्ट से केस वापस कराएं।      
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें