जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि अयोध्या में रामलला का मंदिर बनाने का अधिकार सिर्फ और सिर्फ रामालय ट्रस्ट को है। सुप्रीम कोर्ट से जब भी कोई निर्णय आएगा, तब रामालय ट्रस्ट ही मंदिर का निर्माण कराएगा। जम्मू कश्मीर में हालात सामान्य करने के लिए उन्होंने सरकार को आबादी का संतुलन बनाने और धारा 370 हटाने का सुझाव दिया।
कनखल स्थित शंकराचार्य मठ में बातचीत करते हुए अयोध्या मसले पर शंकराचार्य स्वरूपानंद ने कहा कि जो लोग कहते हैं कि बाबर और मीर बांकी ने राम मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई थी, वह गलत तथ्य पेश कर रहे हैं। हकीकत यह है कि अयोध्या में मस्जिद कभी थी ही नहीं। यह बात भी पूरी तरह पुष्ट हो चुकी है कि बाबर और मीर बांकी कभी अयोध्या आए ही नहीं।
ऐसे में वहां मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाने का कोई सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि जो लोग मंदिर बनाने के लिए दोनों सदनों में विधेयक लाने और समर्थन जुटाने की बात कर रहे हैं, इसका वास्तविकता से कोई सरोकार नहीं है। राम मंदिर निर्माण के लिए कोई विधेयक लाने की जरूरत नहीं है। तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव के समय अधिग्रहीत की गई भूमि पर राम मंदिर का निर्माण बिना विधेयक के किया जा सकता है और रामालय ट्रस्ट इसे करके दिखाएगा। ट्रस्ट में खुद शंकराचार्य के साथ-साथ रामानंदाचार्य सहित अन्य संतगण शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि एक बार जैन मुनि सुशील महाराज ने हिंदू और मुस्लिम पक्षकारों के बीच समझौता कराने का प्रयास किया था। इस बैठक में जो मुस्लिम विद्वान पहुंचे थे, उन्हें सभी तथ्य दिखाकर संतुष्ट करने का प्रयास किया गया था कि राम लला स्थल पर कभी मस्जिद नहीं रही, लेकिन जैसे ही बात समाधान की तरफ पहुंचने लगी कुछ हिंदू मत के लोगों ने ही विरोध करना शुरू कर दिया। उन्होंने यह कहते हुए वाकआउट कर दिया कि खुद शंकराचार्य हिंदुओं के मान्य प्रतिनिधि नहीं हैं और मुस्लिमों से उन्हें कोई बात नहीं करनी है।