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शक्तिमान प्रकरण: गणेश जोशी समेत पांच आरोपी दोषमुक्त, पुलिस के घोड़े शक्तिमान की हुई थी मौत

Thu, 23 Sep 2021 03:25 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

14 मार्च 2016 को विधानसभा कूच के दौरान गणेश जोशी, योगेंद्र रावत समेत पांच लोगों पर पुलिस के घोड़े शक्तिमान की टांग तोड़ने का आरोप था। तब यह मामला सोशल मीडिया पर बेहद चर्चित हुआ था। गणेश जोशी को कुछ वक्त जेल में भी रहना पड़ा था।
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- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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शक्तिमान (पुलिस का घोड़ा) की मौत के मामले में आरोपी कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी समेत पांचों आरोपियों को सीजेएम (मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट) कोर्ट ने संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। इस मामले में आरोपियों पर लगाए गए आरोपों को साबित करने के लिए अभियोजन के पास पर्याप्त ठोस सुबूत नहीं थे। अदालत के फैसले के बाद मंत्री गणेश जोशी ने बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों के साथ प्रसन्नता भी जाहिर की।

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मामला वर्ष 2016 का है। 14 मार्च को विधानसभा सत्र के दौरान भाजपा का प्रदर्शन था। तत्कालीन विधायक गणेश जोशी अन्य नेताओं के साथ रिस्पना पुल पर मौजूद थे। यहां उन्हें भारी पुलिस फोर्स ने बैरिकेडिंग कर रोक लिया। इस दौरान घुड़सवार पुलिस भी मौजूद थी। प्रदर्शन के बीच शक्तिमान नाम के पुलिस के घोड़े का पैर टूट गया। प्रदर्शन वहीं समाप्त हो गया और शक्तिमान का पुलिस लाइन में इलाज शुरू किया गया। इसके बाद पुलिस ने नेहरू कॉलोनी थाने में तत्कालीन विधायक गणेश जोशी, प्रमोद बोरा, जोगेंद्र सिंह पुंडीर, अभिषेक गौड़ और राहुल रावत के खिलाफ एक राय होकर बलवा, पुलिस से मारपीट, सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने और घोड़े को घायल करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया। पुलिस ने 18 मार्च 2016 को गणेश जोशी को एक होटल से गिरफ्तार कर लिया था। इस बीच शक्तिमान का इलाज चल रहा था। गणेश जोशी को 22 मार्च को जमानत मिल गई। 

20 अप्रैल 2016 को शक्तिमान की मृत्यु हो गई। मामले में पुलिस ने पांचों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। बीच में दो बार मुकदमा वापसी की अर्जी भी सरकार की ओर से कोर्ट में लगाई गई, लेकिन न्यायालय ने इससे इनकार कर लिया। मुकदमे का करीब चार साल ट्रायल चला। बृहस्पतिवार को सीजेएम लक्ष्मण सिंह की अदालत ने माना कि अभियोजन पूरे मामले में आरोपों को सिद्ध करने के लिए कोई ठोस सुबूत प्रस्तुत नहीं कर सकी। ऐसे में अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए पांचों आरोपियों को ससम्मान बरी कर दिया।

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अभियोजन ने पेश किए 18 गवाह, कोर्ट में साबित हुई दुर्घटना

मुकदमे में अभियोजन की ओर से पुलिसकर्मियों समेत कुल 18 गवाह प्रस्तुत किए थे, लेकिन इनमें से डॉक्टर की गवाही के आधार पर शक्तिमान की टांग तोड़ने नहीं बल्कि एक दुर्घटना साबित हुआ है। मामले में वीडियो भी प्रस्तुत किया गया था। इससे भी जोशी व अन्य पर दोष सिद्ध नहीं हो पाए। 

दरअसल, 14 मार्च 2016 को घोड़े की टांग टूटी थी। कुछ पुलिसकर्मी वहां की वीडियोग्राफी भी कर रहे थे। एक वीडियो में दिखा कि विधायक गणेश जोशी ने घोड़े के सामने डंडा उठाया हुआ है। इस वीडियो के आधार पर पुलिस ने गणेश जोशी व चार अन्य के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया। अदालत में गवाहों से जिरह हुई तो टांग टूटने को क्रूरता नहीं बल्कि एक दुर्घटना माना गया। अदालत में बचाव पक्ष ने भी एक वीडियो प्रस्तुत की। इससे साबित हुआ कि भीड़ के बीच किसी ने घोड़े का चमड़ा खींचा था। इसमें गणेश जोशी नहीं दिख रहे हैं। गणेश जोशी के हाथ में डंडा जरूर है, लेकिन वह घोड़े के सामने हैं। 

अदालत में डॉक्टर ने बयान दिए कि घोड़े के सामने के हिस्से पर कोई चोट नहीं है। घोड़े का चमड़ा खींचने से वह नीचे गिरा और उसका बांया पैर पीछे एंगल में फंस गया। ऐसे में यह सब एक दुर्घटना साबित होता है। मामले में अभियोजन ने पुलिसकर्मियों समेत कुल 18 गवाह प्रस्तुत किए थे।
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