मुकदमे में अभियोजन की ओर से पुलिसकर्मियों समेत कुल 18 गवाह प्रस्तुत किए थे, लेकिन इनमें से डॉक्टर की गवाही के आधार पर शक्तिमान की टांग तोड़ने नहीं बल्कि एक दुर्घटना साबित हुआ है। मामले में वीडियो भी प्रस्तुत किया गया था। इससे भी जोशी व अन्य पर दोष सिद्ध नहीं हो पाए।
दरअसल, 14 मार्च 2016 को घोड़े की टांग टूटी थी। कुछ पुलिसकर्मी वहां की वीडियोग्राफी भी कर रहे थे। एक वीडियो में दिखा कि विधायक गणेश जोशी ने घोड़े के सामने डंडा उठाया हुआ है। इस वीडियो के आधार पर पुलिस ने गणेश जोशी व चार अन्य के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया। अदालत में गवाहों से जिरह हुई तो टांग टूटने को क्रूरता नहीं बल्कि एक दुर्घटना माना गया। अदालत में बचाव पक्ष ने भी एक वीडियो प्रस्तुत की। इससे साबित हुआ कि भीड़ के बीच किसी ने घोड़े का चमड़ा खींचा था। इसमें गणेश जोशी नहीं दिख रहे हैं। गणेश जोशी के हाथ में डंडा जरूर है, लेकिन वह घोड़े के सामने हैं।
अदालत में डॉक्टर ने बयान दिए कि घोड़े के सामने के हिस्से पर कोई चोट नहीं है। घोड़े का चमड़ा खींचने से वह नीचे गिरा और उसका बांया पैर पीछे एंगल में फंस गया। ऐसे में यह सब एक दुर्घटना साबित होता है। मामले में अभियोजन ने पुलिसकर्मियों समेत कुल 18 गवाह प्रस्तुत किए थे।