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महिला के सामने किसी को गाली देना भी है यौन शोषण, जानिए इससे जुड़े महिलाओं के अधिकार

Sat, 22 Sep 2018 08:21 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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molestation
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किसी की फब्तियां, ताने या किसी के सामने अश्लील शब्द सुनकर खामोश न रहें। अपनी आवाज उठाएं।

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सरकार ने महिलाओं के यौन शोषण से संबंधित कानून बेहद सख्त बनाए हैं। इसमें मजाक में बोली गई बात भी यौन शोषण की श्रेणी में आती है। हम आपको बताते हैं कि यौन शोषण क्या होता है और इसमें कब, कहां व कैसे शिकायत करनी चाहिए।

कई बार महिलाओं को पता ही नहीं होता कि उनका शोषण हो रहा है। काम की जगह पर मिलें ताने अक्सर सिर्फ  ताने समझ कर टाल देती हैं।

क्या होता है यौन शोषण

वरिष्ठ अधिवक्ता आरएस राघव के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट की विशाखा गाइडलाइंस में ऐसा जरूरी नहीं कि यौन शोषण का मतलब केवल शारीरिक शोषण ही हो।

आपके काम की जगह पर किसी भी तरह का भेदभाव जो आपको एक पुरुष सहकर्मी से अलग करे या आपको कोई नुकसान सिर्फ इसलिए पहुंचे, क्योंकि आप एक महिला हैं, तो वह शोषण है।

आपके काम की जगह पर किसी पुरुष द्वारा मांगा गया शारीरिक लाभ, आपके शरीर या रंग पर की गई कोई टिप्पणी, गंदे मजाक, छेड़खानी, जानबूझकर किसी तरीके से आपके शरीर को छूना, आप और आपसे जुड़े किसी कर्मचारी के बारे में फैलाई गई यौन संबंध की अफ वाह, पॉर्न फिल्में या अपमानजनक तस्वीरें दिखाना या भेजना, शारीरीक लाभ के बदले आपको भविष्य में फयदे या नुकसान का वादा करना, आपकी तरफ  किए गए गंदे इशारे या आपसे की गई कोई गंदी बात, सब योन शोषण का हिस्सा है।

हर संस्थान में अंदरूनी शिकायत समिति जरूरी

कानूनी तौर पर देखें तो हर संस्थान, जिसमें दस से अधिक कर्मचारी काम करते हों। वहां महिलाओं का यौन उत्पीड़न (निवारण निषेध और निवारण) अधिनियम 2013 के तहत अंदरूनी शिकायत समिति होनी जरूरी है। आप अपनी शिकायत लिखित रूप में अपने बॉस को दे सकती हैं या फि र अपने एचआर विभाग को भी दे सकती हैं।

यह शिकायत आपको घटना या आखिरी घटना के तीन माह के भीतर ही दर्ज करानी होगी। अगर आपके पास कोई सबूत है जैसे कोई मैसेज, कोई ई-मेल, कोई रिकॉर्डिंग भी जमा कर सकती हैं।

शिकायत मिलने पर समिति को मामले की जांच पड़ताल 90 दिन के अंदर खत्म कर अपनी रिपोर्ट पेश करना जरूरी है। इसके लिए समिति दोनों पक्षों से पूछताछ कर सकती है।

आपकी पहचान को गोपनीय रखना समिति की जिम्मेदारी

आपके बाकी सहकर्मियों से भी गवाह के तौर पर सवाल-जवाब किए जा सकते हैं। आपकी पहचान को गोपनीय रखना समिति की जिम्मेदारी है। जरूरी नहीं कि आप उस संस्थान की परमानेंट कर्मचारी हो।

टेंपरेरी, संविदा, इंटर्न या ट्रेनी हों, तब भी इसी प्रक्रिया के तहत आपकी शिकायत पर कार्रवाई होगी। यही नहीं, अगर कोई महिला अपनी शारिरिक या मानसिक हालत के कारण या मौत के कारण शिकायत दर्ज नहीं कर पाती तो ऐसे में आपका कानूनी वारिस शिकायत दर्ज कर सकता है। दोषी पाए जाने पर संस्थान उस कर्मचारी पर आवश्यक कार्रवाई कर सकता है।

अगर शिकायतकर्ता उस संस्थान में उस व्यक्ति विशेष के रहते काम नहीं करना चाहती तो ऐसे में उसे संस्थान से निकाला भी जा सकता है। हालांकि अगर माफी से बात बन जाए तो ऐसे में एक मौका और दिया जा सकता है। अगर आप संस्थान में शिकायत नहीं करना चाहती हैं तो नजदीकी पुलिस स्टेशन में भी शिकायत दर्ज करा सकती हैं। 
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ऐसे करें पुलिस को शिकायत

अगर आप किसी भी संस्थान में यौन उत्पीड़न का शिकार होती हैं तो सीधे 1090 पर कॉल कर सकती हैं। यहां पुलिस आपकी मदद करेगी।

इसके अलावा आप वेबसाइट पर ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज करा सकती हैं। पुलिस का मोबाइल ऐप भी रख सकती हैं।

महिला के सामने किसी को गाली देना, महिला के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला कोई काम, कोई ऐसा काम जिसमें महिला को उसके महिला होने की वजह से नीचा दिखाए, सभी यौन शोषण की श्रेणी में आता है। महिलाएं न केवल अपने संस्थान में शिकायत कर सकती हैं बल्कि पुलिस को भी बता सकती हैं।
-आरएस राघव, वरिष्ठ अधिवक्ता
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