महंगाई भत्ते की किस्त जारी करने के बाद अब प्रदेश सरकार सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत संशोधित भत्तों को देने का मन बना रही है।
वह खर्च का आंकलन करने में जुटी है। इस मसले पर आने वाले दिनों में फैसला लिया जा सकता है। भत्ते बढ़ाए जाने से सरकारी खजाने पर 350 से 400 करोड़ का सालाना बोझ पड़ने का अनुमान है।
पूर्व मुख्य सचिव इंदु कुमार पांडेय की अध्यक्षता में गठित वेतन समिति ने प्रदेश सरकार को जो संस्तुतियां सौंपी हैं, उन पर प्रदेश मंत्रिमंडल ने मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया है।
वित्तीय संकट है बड़ी अड़चन
यह समिति पिछले दो दिनों से भत्तों के निर्धारण को लेकर माथापच्ची कर रही है। प्रस्तावित भत्तों के हिसाब से खर्च का आंकलन हो रहा है।
सचिव वित्त अमित सिंह नेगी के मुताबिक, ‘भत्तों के संबंध में वेतन समिति ने खर्च का जो अनुमान लगाया है, आंकलन उसके आसपास ही है।’ सूत्रों के मुताबिक, कमेटी भत्तों को लेकर अपना होमवर्क तकरीबन पूरा कर चुकी है। अब इसकी रिपोर्ट प्रदेश मंत्रिमंडल के समक्ष रखी जाएगी। भत्तों को जारी करने के संबंध में निर्णय मंत्रिपरिषद में होगा।
भत्तों की राह में सबसे बड़ी अड़चन प्रदेश के आर्थिक संकट को माना जा रहा है। सातवां वेतनमान देने के बाद सरकार पर खर्च का दबाव बढ़ा है। भत्तों की अदायगी से इस दबाव के और अधिक बढ़ने की संभावना है। सूत्रों की मानें तो भत्तों के आंकलन के साथ कमेटी सरकार की वित्तीय स्थिति को भी सामने रखेगी।
थराली उपचुनाव के बाद होगा निर्णय
कर्मचारियों के बढ़ते दबाव के बाद शासन स्तर पर भत्तों को लेकर बेशक कसरत तेज हो गई है। लेकिन सूत्रों की मानें तो सरकार भत्तों पर निर्णय थराली उपचुनाव के बाद ही लेगी। ऐसा उपचुनाव में आदर्श चुनाव आचार संहिता की वजह से माना जा रहा है।
कर्मचारियों को दिए जा रहे भत्ते
भत्ता - श्रेणी
मकान किराया - बी1-ग्रेड वेतन का 75 प्रतिशत
- जनपद स्तर पर- ग्रेड वेतन का 50 प्रतिशत
- अन्य- ग्रेड वेतन का 40 प्रतिशत
पर्वतीय विकास भत्ता- ग्रेड वेतन का 10 प्रतिशत(अधिकतम 540 रुपये)
विशेष भत्ता - ग्रेड वेतन का 10 प्रतिशत