दहेज के लिए एक पति इतना हैवान बन गया कि पत्नी रोज-रोज की यातनाएं सहन नहीं कर पाई। एक दिन पत्नी ने आत्महत्या जैसा बड़ा कदम उठा लिया।
दहेज की मांग के लिए आए दिन मारपीट और प्रताड़ित कर पत्नी को आत्महत्या के लिए मजबूर करने के मामले में सेशन जज हरीश कुमार गोयल की अदालत ने पति को दोषी मानते हुए 7 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। दोषी को अलग-अलग धराओं कारावास के साथ अर्थदंड की सजा भी सुनाई गई है।
अदालत के अनुसार सभी सजाएं एक साथ चलेगी। सोमवार को अदालत में सरकारी अधिवक्ता केपी खन्ना की पैरवी पर सेशन जज ने बलवीर लाल पुत्र मूसा लाल, निवासी कंडारा, पटवारी क्षेत्र भटवाड़ी-सुनार (ऊखीमठ) को अपनी पत्नी कुशला देवी पुत्री शिव लाल, निवासी लमगौंडी को दहेज के लिए प्रताड़ित कर आत्महत्या के लिए मजबूर करने का दोषी पाया।
कहा कि विवाह जैसे पवित्र संबंध में दहेज के नाम पर कलंकित करना मानवता को शर्मसार करना है, जो माफी लायक नहीं है। सेशन जज ने बलवीर लाल को दोषी मानते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 304 (बी) के तहत दोषी मानते हुए 7 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई।