धर्मनगरी में जानलेवा रोग डेंगू ने दस्तक दे दी है। हरिद्वार शहर में सात मरीजों में डेंगू के लक्षण पाए गए हैं। डेंगू की दस्तक से महकमे के हाथ-पांव फूल गए हैं।
मरीजों का इलाज मेला अस्पताल और जगजीतपुर स्थित एक निजी अस्पताल में किया जा रहा है। सोमवार को आईडीएसपी की टीम ने मंगलौर कस्बे में डेंगू के लार्वा खोजे थे।
सामने आए डेंगू के सात मरीज
पीने के पानी में पनपे लार्वा को तुरंत नष्ट करा दिया था। मंगलवार को सात मरीज डेंगू के सामने आए हैं। सभी मरीज हरिद्वार शहर में मिले हैं। इनमें दो महिलाएं और पांच पुरुष हैं।
डेंगू के मरीजों का मेला अस्पताल और जगजीतपुर मार्ग के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है। कई अन्य लोगों में भी डेंगू की पुष्टि होने की संभावना जताई जा रही है। इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग भी गंभीर हो गया है।
मेला अस्पताल के डा. नवनीत कुमार ने बताया कि उनके अस्पताल में चार मरीजों का इलाज चल रहा है। तीन मरीज निजी अस्पताल में इलाज करा रहे हैं।
क्यों होता हैं डेंगू
डेंगू एडीज इजिप्टी नाम के मच्छर के काटने से होता है। यह मच्छर दिन में काटता है। डेंगू का वायरस मच्छर के जरिए इंसान के शरीर में प्रवेश करता है। इसका लार्वा रुके हुए पानी और जमा किए गए पानी में पनपनता है।
क्या करें उपचार
डेंगू को हल्के में नहीं लेना चाहिए। बीमारी के लक्षण होते ही तुरंत अस्पताल में इलाज शुरू कराना चाहिए। यह संक्रमित रोग है, लिहाजा लापरवाही घातक हो सकती है।
क्या हैं लक्षण
-तेज बुखार होना
-शरीर पर चकत्ते होना
-चकत्तों से खून निकलना
-चकत्तों का पैरों से शुरू होना
-उल्टी होना, हड्डियों और मांसपेशियों में दर्द
क्या है तैयारी
स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू के लिए अलग वार्ड बनाए हैं। हरिद्वार में मेला अस्पताल और रुड़की में सिविल हॉस्पिटल में व्यवस्था की गई है। डेंगू की जांच के लिए भी विभाग ने तैयारी की है। बावजूद इसके विभागीय लापरवाही के चलते मरीज निजी अस्पतालों का रुख कर रहे हैं।
डेंगू और मलेरिया से निपटने के लिए विभाग तैयार हैं। मातहत चिकित्सकों को दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
-डा. सुषमा गुप्ता, सीएमओ, हरिद्वार।