आर्थिक आधार पर आरक्षण देने के संकल्प और बैकलॉग के पदों पर भर्ती के वायदे के साथ विधानसभा के दो दिनी विशेष सत्र का शुक्रवार को समापन हुआ। विशेष सत्र के समापन दिवस पर ‘उत्तराखंड पर्वतीय क्षेत्रों के लिए जोत चकबंदी एवं भूमि व्यवस्था विधेयक 2016’ और उत्तराखंड बेनामी लेनदेन प्रतिषेध विधेयक 2016 समेत सात महत्वपूर्ण विधेयकों पर मुहर लगाई गई।
इस दौरान दूसरे दिन भी विपक्षी भाजपा ने सदन का बहिष्कार जारी रखा। विशेष सत्र में दो दिनों के दौरान वित्त विनियोग समेत कुल 10 विधेयक पारित किए गए।
सदन सुबह 11 बजे शुरू हुआ। सदन शुरू होने से पहले इस बात के कयास लगाए जा रहे थे कि विपक्षी भाजपा दूसरे दिन सदन की कार्रवाई में शामिल होगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट समेत भाजपा के सभी विधायकों ने मुंह पर काली पट्टी बांधकर सदन की सीढ़ियों पर बैठकर विरोध प्रदर्शन किया।
आर्थिक आधार पर आरक्षण देने का संकल्प
harish rawat in uttarakhand assembly
- फोटो : अमरउजाला
विपक्ष विहीन सत्र को दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दिया गया। दो घंटे बाद, एक बार फिर सत्र की शुरूआत हुई। विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल को उम्मीद थी कि विपक्षी भाजपा विरोध प्रदर्शन के बाद सदन की कार्रवाई में हिस्सा लेगी, लेकिन भाजपा ने सदन का बहिष्कार जारी रखा। ऐसे में विधानसभा अध्यक्ष को बगैर विपक्ष के ही फिर सदन की कार्यवाही शुरू करनी पड़ी।
दोपहर दो बजे से तीन बजकर नौ मिनट के बीच ताबड़तोड़ सात विधेयक पास कर दिए गए। इस बीच विपक्षी भाजपा से जुड़े जो भी प्रस्ताव आए थे, उन पर चर्चा नहीं हो सकी। जबकि कई पुराने प्रस्तावों को सदन ने विलोपित कर दिया गया।
इसी दौरान मुख्यमंत्री ने सदन के समक्ष आर्थिक आधार पर पिछड़े लोगों को भी नौकरी में आरक्षण देने का संकल्प रखा। सदन ने इस संकल्प को बहुमत से पारित कर दिया। अब यह संकल्प केंद्र को भेजा जाएगा।
इन विधेयकों पर लगी मुहर
कांग्रेस का दावा है कि आर्थिक आधार पर आरक्षण का संकल्प पारित करने वाले चुनिंदा प्रदेशों में आज उत्तराखंड भी शामिल हो गया।
सत्र के दूसरे दिन हिमालयन गढ़वाल विवि विधेयक, रास बिहारी बोस सुभारती विवि विधेयक, उत्तराखंड बेनामी लेनदेन प्रतिषेध विधेयक, उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम 1959 संशोधन) विधेयक, उत्तराखंड मूल्यवर्धित कर (द्वितीय संशोधन) विधेयक, उत्तराखंड आमोद एवं पणकर संशोधन विधेयक, उत्तराखंड विधानसभा की प्रक्रिया और कार्य संचालन नियमावली सहित कुल सात विधेयकों को मंजूरी दी गई।