जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे गंभीर मरीजों को उप जिला अस्पताल से रेफर कर दिया जाता है। जबकि, अस्पताल में ट्रॉमा सेंटर है। सर्जन और विशेषज्ञ भी उपलब्ध हैं। लेकिन, सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी जांच की सुविधा नहीं है। ऐसे में हर माह 40 से 45 गंभीर घायलों को रेफर कर दिया जाता है।
उप जिला अस्पताल पछवादून और जौनसार बावर का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है। जौनसार बावर का अधिकतर क्षेत्र पर्वतीय है। वहीं, पछवादून और जौनसार बावर से दिल्ली-यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग, दून-पांवटा राष्ट्रीय राजमार्ग और
मसूरी-चकराता-त्यूणी-मलेथा राष्ट्रीय राजमार्ग भी गुजरते हैं। ऐसे में दुर्घटनाओं के मामले में क्षेत्र बेहद संवेदनशील है। दुर्घटना में घायल लोगों को समय पर उपचार मुहैया करवाने के लिए उप जिला अस्पताल में ट्रॉमा सेंटर बनाया गया था। ट्रॉमा सेंटर में घायलों के उपचार के लिए सर्जन, हड्डी रोग, दंत रोग, कान, नाक, गला रोग, नेत्र रोग आदि के विशेषज्ञ भी हैं। उसके बाद भी घायलों को दून अस्पताल रेफर कर दिया जाता है, जो करीब 45 किमी दूर है। इससे उपचार शुरू होने में अधिक समय लग जाता है।
स्वास्थ्यकर्मियों ने बताया कि दुर्घटनाओं के अधिकतर मामलों में घायल के सिर, रीढ़ की हड्डी, पेट में चोट लगी होती है। कई घायलों के शरीर में आंतरिक रक्तस्राव भी होता है। ऐसे गंभीर घायलों की सिटी स्कैन और एमआरआई जांच की जरूरत होती है। लेकिन, अस्पताल में जांच की सुविधा नहीं है। इसलिए, गंभीर घायलों को रेफर कर दिया जाता है। मई माह में 40 गंभीर घायलों को अस्पताल से हायर सेंटर रेफर किया गया।
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वर्जन
डाकपत्थर में नया अस्पताल भवन बनकर तैयार हो गया है। नए अस्पताल भवन में सिटी स्कैन और एमआरआई जांच जैसी सुविधाओं के लिए शासन को पत्र लिखा जाएगा। - डॉ. प्रदीप चौहान, सीएमएस