यूपी के मंत्री शाहिद मंजूर की 10 मई को डूबी बेटी अदीबा गंगा नदी के सबसे बड़े सर्च ऑपरेशन में नहीं मिल सकी।
आर्मी एडवेंचर विंग, स्कूबा डायवर्स, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, जल पुलिस के प्रशिक्षित गोताखोर और गंगा की तलहटी...। करीब 20 किमी गंगा क्षेत्र में 10 दिन की मशक्कत, लेकिन नतीजा सिफर। इतने बडे़ रेस्क्यू अभियान के बावजूद बेटी के नहीं मिलने से निराश मंजूर नौवें दिन यूपी चले गए। हालांकि, मंत्री का बेटा बहन के मिलने की आस में यहीं डेरा जमाए है।
ऋषिकेश के फूलचट्टी में कैंपिंग के लिए आई अदीबा के नदी में डूबने के दिन ही मंत्री शाहिद मंजूर शहर में पहुंच गए थे और हर रोज सुबह से शाम से सर्च ऑपरेशन वाले स्थानों पर डटे रहे। हररोज सुबह सात बजे टीमें अभियान में जुटती और शाम लगभग सात बजे तक रेस्क्यू चलता है।
शाहिद मंजूर भूखे-प्यासे हर रोज लगभग 12 घंटे मौके पर ही मौजूद रहे और बेटी अदीबा के जल्द मिलने की उम्मीद बांधे रहे। रेस्क्यू के नौवें दिन मंत्री मंजूर मेरठ लौट चुके हैं, मगर परिजनों ने अदीबा के मिलने की उम्मीद नहीं छोड़ी है। मंत्री के पुत्र नवाजीज और अन्य नाते रिश्तेदार अभी भी सर्च ऑपरेशन पर नजर रखे हुए हैं।
सर्च अभियान में पहली बार लगी 11 टीमें
सर्च ऑपरेशन में पहली मर्तबा 10 से 11 टीमें गंगा में सर्चिंग कर चुकी हैं। मगर दस दिन बाद भी उनके हाथ खाली हैं। इस बीच टीमों ने अन्य डूबे लोगों के शव जरूर बरामद किए, मगर उन्हें अदीबा को ढूंढने में फिलहाल सफलता नहीं मिली है।
थाना लक्ष्मणझूला प्रभारी अमरजीत सिंह ने माना कि यह सबसे बड़ा तलाशी अभियान है। अब तक एसडीआरएसफ, एनडीआरएफ, आर्मी की दो टीमें, पीएसी, हरिद्वार, ऋषिकेश, मुनिकीरेती और लक्ष्मणझूला जल पुलिस की टीमें, मुजफ्फरनगर के गोताखोरों का दल गंगा को खंगाल चुका है। सर्च ऑपरेशन अभी जारी रहेगा।
पत्थर में फंसा हो सकता है शव!
दस दिनों में दस से अधिक टीमों के गंगा का कोना कोना खंगालने के बावजूद अभी तक अदीबा का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। इससे उसके शव के गंगा की तलहटी पर किसी पत्थर में फंसे होने की आशंका है।
लक्ष्मणझूला पुलिस ने इस तरह की आशंका से इनकार नहीं किया है। थानाध्यक्ष की मानें तो कई दफा शव के पत्थर के नीचे फंस जाने से वह सामान्य स्थिति में फूलकर भी जल्द से सतह पर नहीं आता। उनका मानना है कि शव और अधिक फूलने पर देर सबेर गंगा के ऊपर आएगा।