दून अस्पताल के डॉक्टरों पर मरीज के इलाज में लापरवाही का आरोप लगा है। मरीज को व्हीलचेयर या स्ट्रेचर तक नहीं मिला। परिजन किसी तरह इमरजेंसी में ले गए तो डॉक्टर ने देखने से मना कर दिया। रेफरल पर्चे पर मुहर भी नहीं लगाई गई जिससे दूसरे अस्पताल में मरीज को भर्ती नहीं किया गया। इसके लिए मरीज को दो बार गुरुग्राम से दून के चक्कर लगाने पड़े। परिजनों ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और 104 नंबर पर शिकायत दर्ज कराई है।
जीएमएस रोड निवासी सविता मित्तल (72) का लिवर खराब होने पर डॉक्टर ने ट्रांसप्लांट के लिए कहा है। बेटे अनुराग ने बताया कि मां का इलाज दून के कनिष्क अस्पताल में चल रहा था। लिवर ट्रांसप्लांट की सुविधा न होने पर उन्हें दून अस्पताल रेफर कर दिया गया था। मां को लेकर 12 अप्रैल को दून अस्पताल पहुंचे। आरोप है कि डॉक्टर ने देखते ही कह दिया कि यहां इलाज संभव नहीं है। एक जूनियर डॉक्टर ने पर्चे पर लिखकर रेफर कर दिया।
वह मां को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल ले गए लेकिन पर्चे पर मुहर नहीं होने पर वहां भर्ती करने से इनकार कर दिया गया। ऐसे में बीमार मां को लेकर दोबारा दून अस्पताल आए। आरोप है कि डॉक्टरों ने पर्चे पर मुहर लगाने में फिर आनाकानी की। हंगामा करने पर किसी तरह मुहर लगाई गई। अनुराग का आरोप है कि दून अस्पताल की व्यवस्था बेहद खराब है। पर्चे पर मुहर लगवाने दोबारा जाना था तो डॉक्टर को फोन किया। उन्होंने कहा कि मरीज को लेकर आने पर ही मुहर लगेगी।
वह मां को लेकर दून अस्पताल पहुंचे और डॉक्टर से गाड़ी में ही देखकर पर्चे पर मुहर लगाने की अपील की। क्योंकि, वह चलने में असमर्थ थीं। आरोप है कि डॉक्टर ने नहीं सुनी और अंदर लाने के लिए कहा लेकिन वहां कोई वार्ड ब्वॉय, आया, स्ट्रेचर या व्हीलचेयर नहीं था। कोई मदद के लिए नहीं आया। इमरजेंसी की सीढ़ियां चढ़ाकर पैदल मां को ले गए।
निशुल्क इलाज के लिए मुहर जरूरी थी
अनुराग ने बताया कि उनके पिता सरकारी नौकरी में थे। उन्हें निशुल्क इलाज के लिए गोल्डन कार्ड मिला है। गोल्डन कार्ड दूसरे राज्य में तभी मान्य होता है, जब रेफरल पर्चे पर संबंधित अस्पताल की मुहर लगी होती है।
फोन पर फोन किए लेकिन नहीं हुई सुनवाई
अनुराग ने बताया कि उन्होंने दून मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना, सीएमएस डॉ. यूसुफ रिजवी, डिप्टी एमएस डॉ. धनंजय डोभाल, डॉ. अनुराग अग्रवाल को फोन किए, लेकिन कहीं से कोई मदद नहीं मिली।
डॉक्टर पर पैसे लेने का आरोप
अनुराग ने आरोप लगाया है कि इमरजेंसी में मौदूग जूनियर डॉक्टर ने कहा कि मरीज को नहीं देखेंगे, जो करना है कर लो। ईएमओ डॉ. नरेश से कहने के बाद भी मुहर नहीं लगाई गई। यही नहीं, मेडिकल बनवाने के लिए पैसे लेने का आरोप भी है।
इस मामले में जो भी शिकायत आई है, अस्पताल के एमएस से उसकी जानकारी लेंगे। इसके बाद ही कुछ कह सकेंगे।
-डॉ. आशुतोष सयाना, प्राचार्य, दून मेडिकल कॉलेज