नागरिक उड्डयन मंत्रालय की संयुक्त सचिव उषा ने कहा कि सी-प्लेन पर एमओयू केंद्र सरकार के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। वाटर ड्रोम के लिए पहली बार किसी राज्य के साथ एमओयू किया गया है। उड़ान योजना के क्रियान्वयन में प्रदेश सरकार ने काफी सक्रियता दिखाई है। प्रदेश में हवाई सेवाओं के विस्तार में राज्य सरकार ने हमेशा सहयोग दिया है। उड़ान योजना में एयरपोर्ट डेवलपमेंट पर होने वाले खर्च का सारा भुगतान केंद्र सरकार ओर से किया जाएगा। राज्य में 13 एयरपोर्ट विकसित किए जाने हैं। इनमें 10 की डीपीआर तैयार है। जौलीग्रांट एयरपोर्ट को भी विकसित किया जा रहा है। इसके टर्मिनल की क्षमता को 150 से बढ़ाकर 1800 किया जाएगा। अगस्त माह में फिक्की के सहयोग से देहरादून में हेलीकॉप्टर कान्क्लेव आयोजित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पवन हंस की ओर से सीएसआर के अंतर्गत शिक्षा के क्षेत्र में 60 लाख रुपये की सहयोग राशि दी जाएगी।
टिहरी झील के समीप 2.5 हेक्टेयर भूमि का चयन
सचिव नागरिक उड्डयन दिलीप जावलकर ने बताया कि केंद्र सरकार की उड़ान योजना के तहत सी-प्लेन संचालन के लिए टिहरी झील को चयनित किया गया है। वाटर ड्रोम की स्थापना व हवाई सेवाओं के संचालन के लिए झील के निकट 2.5 हेक्टेयर भूमि का चयन किया गया है। सी-प्लेन के लिए ऑपरेटर का चयन टेंडर के माध्यम से नागरिक उड्डयन मंत्रालय के माध्यम से किया जाएगा। जबकि संचालन व अन्य तकनीकी को इंडिया एयरपोर्ट अथॉरिटी तय करेगी। प्रदेश सरकार की ओर से सी-प्लेन के लिए टिहरी में आधारभूत सुविधाओं को विकसित किया जाएगा। इस पर होने वाले खर्च के लिए मुख्यमंत्री ने सहमति प्रदान कर दी है, लेकिन बाद में इस राशि की प्रतिपूर्ति केंद्र की ओर से जाएगी। एमओयू के बाद जल्द ही डीपीआर बनाने और केंद्र की तरफ से टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।