स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (एसडीआरएफ) ने सतोपंथ पर्वत पर उत्तराखंड पुलिस का फ्लैग लहराकर नया इतिहास रचा है। सतोपंथ पर्वत की ऊंचाई 23263 फीट (7075 मीटर) है।
डीजीपी एमए गणपति ने 18 मई को टीम को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। 17 सदस्यीय टीम ने 23 दिनों की चढ़ाई के बाद 10 जून को सतोपंथ पर्वत फ्लैग लहराया। टीम की सकुशल वापसी पर डीजीपी ने बधाइ दी है।
16 जून 2013 को केदारनाथ आपदा के बाद नौ अक्तूबर 2013 को एसडीआरएफ का गठन हुआ था। एसडीआरएफ प्राकृतिक आपदा और अन्य दुर्घटनाओं के समय राहत एवं बचाव कार्य करती है।
राज्य की विषम पर्वतीय भौगोलिक स्थितियों एवं चार धाम यात्रा, कैलाश मानसरोवर यात्रा, नंदा देवी यात्रा, हेमकुंड साहिब यात्रा के अलावा पर्वतारोही एवं ट्रैकर्स के सर्च एंड रेस्क्यू के लिए हाई एल्टिट्यूड रेस्क्यू टीम भी बनाई गई है।
टीम के अधिकारियों को नेहरू पर्वतारोहण संस्थान उत्तरकाशी से बेसिक एवं एडवांस माउंटे्यरिंग सर्च एंड रेस्क्यू प्रशिक्षण मिला है। रेस्क्यू के लिए टीम को अत्याधुनिक उपकरणों से लेस किया है।
नोएडा के पर्वतारोही को बचाया
डीजीपी के मुताबिक टीम की कार्यक्षमता बढ़ाने के मकसद से 18 मई को हाई एल्टिट्यूड रेस्क्यू के लिए सतोपंथ पर्वत के लिए रवाना किया गया। एसडीआरएफ के पुलिस महानिरीक्षक संजय गुंज्याल, उप सेनानायक एसडीआरएफ नवनीत सिंह भुल्लर के नेतृत्व में 17 सदस्यीय दल ने उत्तराखंड पुलिस का झंडा फहराया।
नोएडा के पर्वतारोही को बचाया
सतोपंथ पर्वत में वासुकी ताल से आठ किमी आगे करीब 5200 मीटर की ऊंचाई पर पांच जून को छह सदस्यीय पर्वतारोही दल का 24 वर्षीय सदस्य प्रयांग चौधरी, निवासी नोएडा सुराले ग्लेशियर में 50 फीट गहरे कैरावास में गिरने से फंस गया था। हाई एल्टिट्यूड रेस्क्यू टीम के उपनिरीक्षक सतीश कुमार शर्मा, कांस्टेबल सूर्यकांत उनियाल, फायरमैन रवि चौहान, प्रवीण सिंह, वीरेंद्र प्रसाद काला और सुशील कुमार ने प्रयांग को सकुशल निकाल लिया। टीम सदस्यों को प्रधानमंत्री जीवन रक्षक पदक के लिए नामित किया जा रहा है।
एसडीआरएफ अब तक 229 रेस्क्यू ऑपरेशन कर चुकी है। इनमें 3232 व्यक्तियों को सुरक्षित निकाला गया है। 294 शव बरामद किए गए है। टीम भागीरथी द्वितीय 6512 मीटर, माउंट कालिंदी 6100 मीटर, कुल्लू पुमोरी 6575मीटर, श्रीकंठ 6133 मीटर, डीकेंडी द्वितीय 5670 मीटर पर्वतों पर झंझा फहरा चुकी है।
- एमए गणपति, डीजीपी