ऐसे काम करता है सैटेलाइट इंटरनेट
पृथ्वी से लगभग 500-550 किलोमीटर ऊपर हजारों सैटेलाइट्स लगातार पृथ्वी का चक्कर लगाते हैं, जिससे लगातार कनेक्टिविटी बनी रहती है। उपयोगकर्ता को एक छोटी डिश और वाईफाई राउटर की आवश्यकता होती है, जिसे घर की छत पर लगाया जाता है। यूजर का डिवाइस या मोबाइल फोन सिग्नल डिश को देता है। जो उसे सीधे ऊपर अंतरिक्ष में मौजूद स्टारलिंक सैटेलाइट तक भेजती है। सैटेलाइट उस डेटा को जमीन पर बने ग्राउंड स्टेशन को भेजता है। ग्राउंड स्टेशन से डेटा इंटरनेट तक पहुंचता है और फिर इसी प्रक्रिया से वापस यूजर तक आता है।
स्टार लिंक की सेवाओं के लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिली तो इससे एसडीआरएफ की क्षमताओं में वृद्धि होगी। दूर-दराज के क्षेत्रों में आपदा और रेस्क्यू कार्य में काफी मदद मिलेगी।
- अर्पण यदुवंशी, सेनानायक एसडीआरएफ