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Dehradun News: स्क्रीन की लत बढ़ा रही भूलने की आदत

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मोबाइल, टैब, लैपटॉप, कंप्यूटर आदि आज हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा है। इससे जीवन आसान तो हुआ है पर इसका ज्यादा इस्तेमाल स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल रहा है। हर दूसरा व्यक्ति भूलने की आदत से परेशान है। इसकी वजह है मस्तिष्क के रिवार्ड सर्किट में मौजूद डोपामाइन असंतुलन। लंबे समय तक रील देखने, गेम खेलने या अन्य दूसरे कार्य के लिए मोबाइल चलाते रहने से इस तरह की दिक्कतें आ रही हैं। दून अस्पताल के मनोरोग विभाग की ओपीडी में 50 प्रतिशत मरीज भूलने की परेशानी लेकर पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों ने इस पर चिंता जाहिर की है।
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विशेषज्ञों के अनुसार कोई भी व्यक्ति अपने मस्तिष्क से एक साथ औसतन सात चीजों के बारे में सोच सकता है। इनमें से तीन से चार चीजों की जगह फोन ले लेता है। इस बीच लोग जो भी याद करते हैं, उसे तुरंत भूल जाते हैं। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय के मनोराग विभाग की एचओडी डॉ. जया नवानी के मुताबिक शॉट फॉर्म वीडियो में हर 30 सेकेंड सामग्री बदल जाती है। लेकिन लंबी फिल्म देखने और किताबें पढ़ने में काफी देर तक एक ही तरह की चीजें देखनी पड़ती हैं। ऐसे में शॉर्ट फॉर्म वीडियो में लोगों की दिलचस्पी अधिक होती है। यह स्थिति मस्तिष्क के रिवार्ड सर्किट में मौजूद डोपामाइन के स्तर को बढ़ा देता है। जैसे ही आप इसे देखना कम करते हैं, तो डोपामाइन का स्तर गिर जाता है। ऐसी स्थिति में आपको कुछ छूटने का अहसास होने लगता है। ये दोनों स्थिति मनोविकार का रूप ले रही हैं। ओपीडी में बड़ी संख्या में इस तरह के मरीज पहुंच रहे हैं। कुछ भी काम करते या पढ़ाई करते समय बीच-बीच में मोबाइल के नोटिफिकेशन एकाग्रता में बड़ी बाधा हैं। इस कारण मस्तिष्क के लिए यादों को संकलित कर लंबे समय तक याद रखना कठिन हो रहा है।



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Iघंटों तक स्क्रीन देखने की आदत बनी परेशानी
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एम्स ऋषिकेश के मनोरोग विभाग के एचओडी डॉ. रवि गुप्ता ने बताया कि घंटों तक स्क्रीन देखने की आदत भूलने समेत कई तरह की परेशानी पैदा कर सकती है। इसकी लत लगने के बाद जब व्यक्ति को फोन से दूर कर दिया जाए तो उसे परेशानी महसूस होने लगती है। साथ ही व्यवहार में बदलाव, काम में मन न लगना और हर चीज को भूलने की आदत भी देखने को मिलती है।
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Iहेल्थकेयर के अध्ययन को लेकर विशेषज्ञ चिंतित
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विशेषज्ञों के अनुसार वर्ष 2025 में हेल्थकेयर की ओर से 1029 छात्रों पर शोध किया गया। इसमें 31 प्रतिशत पुरुष और शेष महिलाएं शामिल हैं। 31 प्रतिशत पुरुषों में से 56 प्रतिशत पढ़ाई कर रहे थे। इन छात्रों की अकादमिक स्थिति तो ठीक थी, लेकिन कई छात्रों ने मानसिक रूप से बीमार होने की बात कही। इन सब का स्क्रीन टाइम आठ घंटे तक मिला है।
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Iबचाव के उपाय
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ऑनलाइन पढ़ाई कम से कम करें।

इंटरनेट से जुड़ी हुई डिवाइस का इस्तेमाल नियंत्रित करें।



बोलकर पढ़ने की आदत डालें।

बहुत अधिक समय रील देखने में बर्बाद न करें।



काम को शत प्रतिशत एकाग्रता के साथ करें।
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