फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पढ़िए, कैसे सशक्त नारी पड़ रही बाइक इंडस्ट्री पर 'भारी'

Mon, 24 Aug 2015 02:15 PM IST
ओमप्रकाश तिवारी/ अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
विज्ञापन
एक कंपनी के स्कूटर के विज्ञापन वाय शुड बॉयज हैव ऑल द फन? यानि लड़के ही सारी मस्ती क्यों करें? यह विज्ञापन वैसे तो लड़कियों को उत्प्रेरित करने के लिए बनाया गया है, लेकिन इसमें सामाजिक बदलाव की आहट है।
विज्ञापन


मतलब साफ है कि लड़के यदि बाइक की रफ्तार के रोमांच का आनंद ले सकते हैं तो लड़कियां पीछे क्यों रहें? यह बदलाव देहरादून में भी दिखाई देने लगा है। लड़कियों के स्कूटर (स्कूटी) की बिक्री लड़कों की बाइक से आगे निकल गई है।

समाजशास्त्री और मनोचिकित्सक मानते हैं कि समाज में महिलाओं को मिली आजादी की वजह से स्कूटर की बिक्री बढ़ी है। कहते हैं कि आज लड़कियां, युवतियां और महिलाएं स्कूल, कॉलेज और दफ्तर स्कूटर से आ-जा रही हैं।
विज्ञापन


यह उनके लिए उपयोगी, सरल और सुविधाजनक वाहन है। यही वजह है कि यह उनकी पहली पसंद बन गया है। लड़कियां और महिलाएं जितना घर से बाहर निकलेंगी उतनी ही इसकी मांग बढ़ेगी।

दून के संभागीय परिवहन कार्यालय के आंकड़े बताते हैं कि साल 2002 से साल 2012 तक दून में बाइक की बिक्री अधिक रही। लेकिन वर्ष 2013 से स्कूटर की मांग बाइक से अधिक हो गई, जोकि 2014 में भी बनी रही। आंकड़े यह भी बताते हैं कि स्कूटर की मांग साल दर साल बढ़ती गई है।

सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) संदीप सैनी कहते हैं कि स्कूटर स्कूल जाने वाले बच्चों, खासकर लड़कियों में, बहुत लोकप्रिय है। बिना गियर का होने की वजह से इसे चलाना आसान है। इस वजह से कक्षा 9 से ही लड़कियां इसे लेकर स्कूल जाने लगी हैं।

इसके अलावा इसका 16 साल की उम्र से ही ड्राइविंग लाइसेंस बन जाता है। जबकि बाइक कॉलेज जाने वाले युवकों में ही लोकप्रिय है। सैनी बताते हैं कि स्कूटर को परिवार का हर सदस्य चला सकता है जबकि बाइक को हर कोई नहीं चला पाता। यह भी एक वजह है कि स्कूटर की बिक्री बढ़ी है।

एसएसपी पुष्पक ज्योति का कहना है कि स्कूटर को हर वर्ग के हर उम्र के लोग चला सकते हैं, जबकि बाइक केवल लड़कों में लोकप्रिय है। चूंकि स्कूटर के इस्तेमाल करने वालों में महिलाएं, लड़कियां और युवतियों की संख्या अधिक है तो इसकी मांग बढ़ना स्वाभाविक है।

इसी तरह एसपी ट्रैफिक प्रदीप राय भी उनकी बातों से इत्तफाक रखते हैं। राय कहते हैं कि स्पीड के मामले में स्कूटर भी बाइक से कम नहीं है। यह महिलाओं की पसंदीदा सवारी तो है ही घर में आने के बाद इसे प्रत्येक सदस्य इस्तेमाल करता है।
विज्ञापन

साल दर साल स्कूटर-बाइक की बिक्री

साल - स्कूटर - बाइक - अंतर
2002 - 5942 - 7326 - 1384
2003 - 5977 - 9696 - 3719
2004 - 6187 - 10426 - 4239
2005 - 4986 - 13639 - 8653
2006 - 4383 - 16807 - 12424
2007 - 5849 - 15881 - 10032
2008 - 5954 - 13672 - 7718
2009 - 8825 - 15715 - 6890
2010 - 12685 - 17540 - 4855
2011 - 16374 - 18924 - 2550
2012 - 17857 - 18683 - 0826
2013 - 20044 - 16999 - 3045
2014 - 21921 - 16707 - 5214

(नोट : आंकड़े आरटीओ में साल दर साल पंजीकृत वाहनों के अनुसार हैं। आंकड़े बताते हैं कि बाइक की बिक्री जहां साल 2006 तक बढ़ती रही है, वहीं साल 2007 से बाइक की बिक्री में कमी आने लगी और स्कूटर की बिक्री बढ़ती गई है। साल 2012 में स्कूटर से महज 826 बाइक अधिक बिकीं, जबकि अगले ही साल 2013 में बाइक की अपेक्षा 3045 स्कूटर अधिक बिके। इसके अगले साल 2014 में भी स्कूटर की बिक्री बाइक से 5214 अधिक रही।)

महिला सशक्तीकरण की झलक
रफ्तार और स्टाइल की वजह से लड़कों ने यदि बाइक को पसंद किया तो सुरक्षा और सरलता की वजह से लड़कियों ने स्कूटर को तरजीह दी। आज के जमाने में लड़कियां, युवतियां और महिलाएं घर से निकलकर स्कूल, कॉलेज और दफ्तर जा रही हैं। ऐसे में उन्हें एक सुविधाजनक वाहन की जरूरत होती है। स्कूटर उनकी जरूरतों को बखूबी पूरा कर रहा है। जितनी महिलाएं घर से बाहर निकलेंगी उतना ही स्कूटर प्रचलित होगा।
- डॉ. नंद किशोर, मनोचिकित्सक
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें