जल्द ही उत्तराखंड के किसान ई ट्रेडिंग के माध्यम से उत्तराखंड की किसी भी मंडी में अपनी उपज बेच सकेंगे। इससे वे मंडी में उपज के उच्च मूल्य का लाभ उठा सकेंगे।
हरिद्वार की कृषि उत्पादन मंडी समिति में इसके लिए सोमवार से तैयारियां प्रारंभ हो रही हैं। उम्मीद है कि 15 दिन के अंदर वेबसाइट लांच हो जाएगी और यह योजना धरातल पर उतर आएगी। प्रदेश में 19 मंडियां इस योजना से जुड़ेंगी।
इसके लिए राष्ट्रीय कृषि विपणन संस्थान जयपुर की ओर से प्रत्येक राज्य के मंडी प्रतिनिधियों को पांच दिन का प्रशिक्षण दिया गया है। उत्तराखंड से हरिद्वार कृषि उत्पादन मंडी समिति के सभापति संजय चोपड़ा और सचिव विजय प्रसाद थपलियाल ने 17 अगस्त से 21 अगस्त तक जयपुर में यह प्रशिक्षण हासिल किया।
अमेरिका, चीन, रूस, जापान और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में कृषि उपज को ई ट्रेडिंग के माध्यम से ही बेचा जाता है। भारत में कर्नाटक ऐसा राज्य है, जहां मंडी समितियों में ई ट्रेडिंग होती है। कर्नाटक में इसके बेहतर रिजल्ट सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने अन्य राज्यों में भी इसे लागू करने का निर्णय लिया है।
किसानों के लिए ऐसे होगी ई ट्रेडिंग
हरिद्वार का किसान अभी तक अपनी उपज स्थानीय मंडी में ही बेच सकता था। अन्य मंडियों में जाने पर ट्रांसपोर्ट का खर्च बढ़ जाता था। लेकिन अब हरिद्वार मंडी में ही अपनी उपज लेकर आएगा और यहां से ई ट्रेडिंग के माध्यम से प्रदेश की किसी भी मंडी में उसे बेच सकेगा।
मंडी की वेबसाइट के माध्यम से उसकी उपज को प्रसारित किया जाएगा। अन्य मंडी में बैठे व्यापारी वहीं से उसका दाम लगाएंगे। वाजिब दाम मिलने पर किसान उसे बेच देगा। स्थानीय मंडी समिति संबंधित व्यापारी से सुविधा शुल्क लेकर उपज को उसके बताए स्थान पर पहुंचाने की व्यवस्था करेगी।
अब प्रदेश की सभी मंडियां किसानों को आनलाइन मार्केटिंग ई ट्रेडिंग उपलब्ध कराएंगी। प्रदेश में 19 मंडियां इस योजना से जुड़ेंगी। हरिद्वार की चावल, फूल, गेहूं, आम और अन्य फसलों को बेचने के लिए किसानों को अन्य मंडियों का विकल्प भी मिलेगा। इसी तरह पहाड़ की किसी भी नजदीकी मंडी में जाने के बाद वहां का किसान अपनी राजमा, सेब, माल्टा, अखरोट और नाशपाती आदि को किसी अन्य मंडी में बैठे व्यापारी को बेच सकता है। इससे किसानों को अपनी फसल का उचित दाम मिलेगा।
- संजय चोपड़ा, सभापति हरिद्वार कृषि उत्पादन मंडी समिति