डॉ. किशोर कुमार के मुताबिक जीवाश्मों के अध्ययन से यह बात सामने आई है कि वर्तमान में जो गैंडे और घोड़े भारी भरकम आकार के दिखाई दे रहे हैं उनके पूर्वज बिल्ली के आकार के थे। जो समय के साथ आकार में बदलते गए। वर्तमान में घोड़ों और गधों के खुर पाए जाते हैं वैसे ही कैंबेथेरियम के भी खुर पाए जाते थे।।
कैंबे खाड़ी के नाम पर कैंबेथेरियम का नामकरण
डॉ. किशोर कुमार के मुताबिक घोड़े, गैंडों के इन पूर्वजों के जीवाश्म कैंबे खाड़ी के आसपास पाए गए हैं। ऐसे में इन चीजों का नाम कैंबे थेरियम रखा गया है। जहां पर कैंबेथेरियम के जीवाश्म पाए गए हैं वहां कभी मीठे पानी की बड़ी झील हुआ करती थी जिसकी वजह से इन चीजों के जीवाश्म करोड़ों साल तक सुरक्षित रहे।
गुजरात के सूरत जिले के तारकेश्वर व आसपास के इलाकों में स्थित लिग्नाइट की खदानों में पाए गए जीवाश्म के अध्ययन से कैंबे थेरियन प्रजाति के जीवों का पता लगाया गया है जो वर्तमान घोड़ों और गैंडों के पूर्वज थे। अध्ययन से पता चलता है कि खुर वाले स्तनधारी जीवों की सबसे पहले उत्पत्ति भारत में ही हुई। अध्ययन में अमेरिका के हापकिंस यूनिवर्सिटी और रॉयल बेल्जियम इंस्टीट्यूट आफ साइंसेज के वैज्ञानिकों की भी मदद ली गई है। शोध रिपोर्ट को जर्नल ऑफ वर्टेब्रेट पैलियोनटोलॉजी में प्रकाशित किया गया है।
-डॉ. किशोर कुमार, पूर्व वरिष्ठ भूगर्भ विज्ञानी, वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी