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...तो ये है राम सेतु के सबसे बड़े रहस्य का पूरा सच, वैज्ञानिकों ने किया खुलासा

Thu, 14 Dec 2017 11:14 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, देहरादून
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ram setu
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सदियों से वैज्ञानिकों के लिए पहले बनी राम सेतु के अस्तित्व की गुत्थी सुलझ गई है। वैज्ञानिकों ने रिसर्च के बाद इसके विषय में खुलासा भी किया है।
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राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों ने निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए समुद्र के बढ़ते जलस्तर और विभिन्न माइक्रो आर्गनिज्म के अवशेषों की कार्बन डेटिंग का सहारा लिया।

इससे मिले समय को वैज्ञानिकों ने रामायणकाल से जोड़ा तो दोनों की टाइमिंट एक समान पाई गई। यह अध्ययन वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान में हाल ही में आयोजित की गई नेशनल जियो-रिसर्च स्कॉलर्स मीट में रखा गया था।
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इस दौरान राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान के वर्तमान सलाहकार व पूर्व मुख्य वैज्ञानिक राजीव निगम के अध्ययन में दावा किया गया है कि राम सेतु करीब सात हजार साल पहले अस्तित्व में था।

इस तरह से सामने आई रामसेतु की अवधि

राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान के सलाहकार राजीव निगम के मुताबिक राम सेतु की हकीकत का पता लगाने के लिए सबसे पहले रामायणकाल की अवधि जाननी जरूरी थी।

इसके लिए उन्होंने शोधार्थी सरोज बाला के वाल्मीकि रामायण के आधार पर किए गए ‌रिसर्च का सहारा लिया। जिसमें वाल्मीकि रामायण में दर्ज तारों की स्थिति का पता लगाकार प्लेनिटोरियम सॉफ्टवेयर से उस काल का समय निकाला गया। यह अवधि करीब 7000 साल पुरानी पाई गई।

इसके बाद तब से अब तक समुद्र के जल स्तर में आए बदला की गणना की गई। पता चला कि तब से लेकर अब तक समुद्र का जल स्तर तीन मीटर बढ़ गया है और अभी राम सेतु के पत्थर पानी से इतने नीचे तक ही पाए गए हैं। यानी तब राम सेतु के पत्थर सतह पर रहे होंगे और वह पुल की शक्ल में नजर आते होंगे।
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राम सेतु का इतिहास और मान्यता

बताया गया कि राम सेतु का पता चलने के बाद सेतु के पत्थरों में मौजूद सूक्ष्मजीवी फोरामिनिफेरा, कोरल, ऊलाइट्स आदि के अवशेषों की कार्बन डेटिंग कराई गई।

इनकी अवधि भी सात हजार साल पुरानी पाए जाने के बाद यह साफ हो गया कि वाल्मीकि रामायण में दर्ज काल और राम सेतु के पत्थर एक ही अवधि को दर्शाते हैं।

राम सेतु का इतिहास और मान्यता
वैज्ञानिक राजीव निगम के मुताबिक राम सेतु भारत के दक्षिण पूर्वी तट के किनारे रामेश्वरम द्वीप व श्रीलंका के उत्तर पश्चिमी तट पर मन्नार द्वीप के मध्य में चूना पत्थरों से बना है।

इतिहास के प्रमाणों के अनुसार बताया जाता है कि इसकी लंबाई 30 किलोमीटर व चौड़ाई तीन किलोमीटर थी। मान्यता है कि श्रीराम व उनकी सेना ने इसी इसी पुल से लंका पहुंचकर रावण पर विजय हसिल की थी।
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