फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हिमालय बनने की परिस्थितियों का पता लगाएंगे वैज्ञानिक

Fri, 02 Sep 2016 11:08 AM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
हिमालय - फोटो : gettyimages
विज्ञापन
डेढ़ सौ करोड़ से अधिक वर्षों के रहस्य समेटे हिमालय के पत्थरों पर अब देश-दुनिया के वैज्ञानिकों की नजर है। वैज्ञानिक इन पत्थरों का अध्ययन करके करोड़ों साल पहले की पर्यावरणीय और भूगर्भीय स्थितियों से परदा उठाना चाहते हैं। इन पत्थरों पर शोध करने के लिए वैज्ञानिकों ने अलग-अलग पहलुओं पर प्रोजेक्ट तैयार किए हैं। सभी शोधकार्य वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के साथ मिलकर किए जाएंगे।
विज्ञापन


माना जाता है कि हिमालय के वजूद में आने से पहले इस क्षेत्र में भूगर्भीय गतिविधियों ने रफ्तार पकड़ी थी। भूगर्भ में टेक्टॉनिक प्लेटें आपस में टकराकर कमजोर पड़ीं, ज्वालामुखी फूटे और लावा सैकड़ों साल तक बहा। भूगर्भ में समाए पत्थर और चट्टानें धरातल पर आकर समय के साथ ठंडी पड़ीं। टेक्टॉनिक गतिविधि मंद पड़ी और हिमालय बनने का समय आया। धरती की सतह ऊंची होकर पहाड़ की शक्ल अख्तियार करने लगी।

इसके साथ ही भूगर्भ से निकले पत्थर भी ऊपर जाने लगे। वाडिया के वैज्ञानिकों ने आइसोटोपिक जांच में पाया कि ये पत्थर 150 से 180 करोड़ साल पुराने हैं। श्रीनगर, भीमताल, मनीकर्ण, रामपुर, लद्दाख आदि क्षेत्रों से पत्थरों के नमूने लिए गए थे। 9 अक्टूबर, 2015 को वाडिया के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. राजेश शर्मा की अगुवाई में विदेशी वैज्ञानिकों की टीम ने पत्थरों में टेक्टॉनिक विकास और बदलाव के साक्ष्य देखे। वैज्ञानिकों ने अध्ययन में पाया कि शिवालिक बनने के बाद हिमालय में एक बड़ा जलवायु परिवर्तन हुआ था जिसमें वनस्पतियों, वन्य जीवों की कई प्रजातियां पैदा हुईं तो कई के नामो-निशान मिट गए। ये साक्ष्य भारतीय मानव सर्वेक्षण के पास उपलब्ध हैं।
विज्ञापन


होने वाले बदलावों का लगाया जा सकेगा अनुमान
प्रोजेक्ट पर काम करने के लिए इटली, स्विट्जरलैंड, अमेरिका, फ्रांस, जापान समेत कई देशों के वैज्ञानिक आएंगे। पत्थरों के अध्ययन से हिमालय क्षेत्र की भूगर्भीय गतिविधियों को समझने में आसानी होगी। अध्ययन से वैज्ञानिक आगामी बदलावों के संबंध में अनुमान लगा सकेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें