काई से पैदा हो रहे जैविक ईंधन को वैकल्पिक रूप में वाहनों में डीजल के रूप में प्रयोग करने के लिए किया जा सकेगा। इससे ईंधन के मूल्य भी बेहद कम हो जाएंगे। डॉ. पांडे ने बताया कि झीलों की इन काई से 20 से 30 प्रतिशत जैविक ईंधन (तेल) प्राप्त किया गया है।
उद्योगपतियों ने भी सराहा
डॉ. बीना पांडे बताती है कि ऊधमसिंह नगर के बहुत से उद्योगपतियों ने इस शोध कार्य को बड़ी उपलब्धि बताने के साथ पूर्ण सहयोग देने की बात कही है। रुद्रपुर में कृत्रिम झीलों में इन काई को पैदा करने की भी बात कहीं। डॉ. पांडे ने बताया कि इस काई से फैक्ट्रियों का अपशिष्ट पानी समेत धुएं को भी शुद्ध किया जा सकेगा।
जैव प्रौद्योगिकी परिषद कर रहा वित्त पोषित
डॉ. बीना पांडे ने बताया कि इस शोध कार्य में उत्तराखंड जैव प्रौद्योगिकी परिषद हल्दी पंतनगर की ओर से वित्त पोषित (फंड सुविधा) किया जा रह ाहै। पांडे ने बताया इस जैविक ईंधन को प्रामाणिता मिल गई तो इसका प्रयोग वाहनों में ईंधन के रूप में किया जा सकेगा और ईंधन के मूल्य भी बेहद कम हो जाएंगे।