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ग्लोबल वार्मिंग रोकने को समुद्री जीवों को खिलाएंगे खास 'चारा'

Fri, 03 Jun 2016 03:43 AM IST
सुधांशु द्विवेदी/अमर उजाला, देहरादून
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प्रो. सुनील कुमार - फोटो : अमरउजाला
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ग्लोबल वार्मिंग के निपटने के लिए दुनिया भर के वैज्ञानिक खास समुद्री जीवों का ‘पौष्टिक चारा’ बनाने में जुटे हैं। ‘जिओ ट्रेसेज’ नामक इस कार्यक्रम से अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, कनाडा समेत 32 देशों के वैज्ञानिक जुड़े हुए हैं। हिंद महासागर में भारतीय वैज्ञानिक इस पर लगातार शोध कर रहे हैं।
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वैज्ञानिकों के सामने बड़ी चुनौती यह भी है कि इस परियोजना के दौरान किसी भी किस्म की प्राकृतिक छेड़छाड़ की इजाजत नहीं है। समस्या का समाधान पाते ही ग्लोबल वार्मिंग को नियंत्रित करने में यह बड़ा कदम होगा। यह जानकारी फिजिकल रिसर्च लैबोरेट्री, अहमदाबाद के वैज्ञानिक प्रो. सुनील कुमार सिंह ने खास बातचीत में दी। वे यहां वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान में आयोजित सेमिनार में हिस्सा लेने यहां आए हैं।

उन्होंने बताया कि समुद्री जीवों की बहुत सी प्रजातियां ऐसी हैं जो कि ग्लोबल वार्मिंग के लिए जिम्मेदार कार्बन डाई आक्साइड, अन्य गैसें लेकर ऑक्सीजन छोड़ती हैं। उनकी संरचना ऐसी होती है कि वे इन गैसों को अपने शरीर पर कवच के रूप में जमा करती जाती हैं। ठीक घोंघा या शंख जैसा कठोर कवच। इन प्रजातियों को अनेक पोषक तत्वों की जरूरत होती है, जो कि समुद्र से ही मिल जाते हैं।
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कई देशों के वैज्ञानिकों के रिसर्च में सामने आई बात

Sea - फोटो : फाइल फोटो
कई देशों के वैज्ञानिकों ने समुद्र के विभिन्न हिस्सों में रिसर्च के दौरान पाया कि कई बड़े इलाके ऐसे हैं जहां इन पोषक तत्वों की मौजूदगी होते हुए भी पर्यावरण को संतुलित करने वाली इन प्रजातियों की मौजूदगी न के बराबर है। जब इस बारे में बड़े स्तर पर शोध हुआ तो मालूम हुआ कि रेगिस्तान की रेत से कई अल्प पोषक तत्व इन जीवों को मिलते हैं। इनमें आयरन, जिंक, कापर, मैंगनीज आदि प्रमुख हैं।

इन जीवों को इनकी अति अल्प मात्रा की जरूरत होती है, लेकिन उनके पोषण के लिए यह अत्यंत जरूरी हैं। परियोजना के तहत इन जीवों के भोजन में जरूरी अन्य पोषक तत्वों के बारे में अभी शोध जारी है। अब वैज्ञानिकों के सामने बड़ी चुनौती यह है कि कैसे इन जीवों के चारे में ये सूक्ष्म पोषक तत्व पहुंचाए जाएं। क्योंकि जहाज आदि से बिखेरने पर वहां के पर्यावरण पर बुरा असर पड़ सकता है।

भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के विशेष सहयोग से फिजिकल रिसर्च लैबोरेट्री, अहमदाबाद की देखरेख में देश के नौ बड़े शोध संस्थानों ने इस समस्या का समाधान खोजने का बीड़ा उठाया है। इन संस्थानों के वैज्ञानिक हिंद महासागर में इस बारे में गहन शोध में लगे हुए हैं। 
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