प्रो. सुनील कुमार
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ग्लोबल वार्मिंग के निपटने के लिए दुनिया भर के वैज्ञानिक खास समुद्री जीवों का ‘पौष्टिक चारा’ बनाने में जुटे हैं। ‘जिओ ट्रेसेज’ नामक इस कार्यक्रम से अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, कनाडा समेत 32 देशों के वैज्ञानिक जुड़े हुए हैं। हिंद महासागर में भारतीय वैज्ञानिक इस पर लगातार शोध कर रहे हैं।
वैज्ञानिकों के सामने बड़ी चुनौती यह भी है कि इस परियोजना के दौरान किसी भी किस्म की प्राकृतिक छेड़छाड़ की इजाजत नहीं है। समस्या का समाधान पाते ही ग्लोबल वार्मिंग को नियंत्रित करने में यह बड़ा कदम होगा। यह जानकारी फिजिकल रिसर्च लैबोरेट्री, अहमदाबाद के वैज्ञानिक प्रो. सुनील कुमार सिंह ने खास बातचीत में दी। वे यहां वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान में आयोजित सेमिनार में हिस्सा लेने यहां आए हैं।
उन्होंने बताया कि समुद्री जीवों की बहुत सी प्रजातियां ऐसी हैं जो कि ग्लोबल वार्मिंग के लिए जिम्मेदार कार्बन डाई आक्साइड, अन्य गैसें लेकर ऑक्सीजन छोड़ती हैं। उनकी संरचना ऐसी होती है कि वे इन गैसों को अपने शरीर पर कवच के रूप में जमा करती जाती हैं। ठीक घोंघा या शंख जैसा कठोर कवच। इन प्रजातियों को अनेक पोषक तत्वों की जरूरत होती है, जो कि समुद्र से ही मिल जाते हैं।