गत 16 सितंबर को भाऊवाला स्थित बोर्डिंग स्कूल में गैंगरेप की बात सामने आई थी। पुलिस ने जांच की तो पता चला कि यहां छात्रा से विगत 14 अगस्त को चार छात्रों ने गैंगरेप किया था। यह भी पता चला कि छात्रा ने जब यह बात प्रबंधन को बतानी चाही तो उन्होंने इसे दबाने का प्रयास किया।
छात्रा गर्भवती हुई तो उसका जबरन गर्भपात कराया गया। प्राथमिक जांच के आधार पर पुलिस ने निदेशक, प्रिंसिपल, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी, उसकी पत्नी व आया को आपराधिक षड्यंत्र व अन्य धाराओं में गिरफ्तार किया था।
जबकि, तीन नाबालिग छात्रों को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के माध्यम से बाल सुधार गृह भिजवाया और एक बालिग छात्र को गिरफ्तार कर न्यायालय के आदेश पर सुद्धोवाला जेल भेजा।
राजधानी के एक स्कूल ने दुष्कर्म पीड़िता को दाखिला देने से इंकार कर दिया तो दूसरी ओर देहरादून के ही कुछ स्कूलों ने पीड़िता को दाखिला देने की पेशकश की है। दूसरी ओर, प्रिंसिपल प्रोग्रेसिव स्कूल्स एसोसिएशन ने भी इस स्कूल के इस फैसले की निंदा की है।
एशियन स्कूल के प्रिंसिपल एके दास का कहना है कि यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम उस बिटिया को दाखिला दें। उन्होंने पेशकश की है कि अगर अभिभावक चाहें तो उनके स्कूल में दाखिले के लिए आ सकते हैं। बशर्ते छात्रा के विषय हमारे पास उपलब्ध हों। दूसरी ओर, दून वैली इंटरनेशनल स्कूल के निदेशक डॉ. संजय चौधरी ने भी पीड़िता के अभिभावकों को दाखिले की पेशकश की है।
उनका कहना है कि किसी भी बच्ची को उसके साथ हुई अनहोनी के आधार पर दाखिले से नहीं रोका जा सकता है। मामले में प्रिंसिपल प्रोग्रेसिव स्कूल्स एसोसिएशन(पीपीएसए) के अध्यक्ष प्रेम कश्यप ने गढ़ी कैंट स्थित स्कूल के दुष्कर्म पीड़िता होने के आधार पर दाखिले से इंकार करने की निंदा की है। उनका कहना है कि हम सभी की जिम्मेदारी बनती है कि ऐसी बच्चियों को सपोर्ट करें। उन्हें आगे बढ़ाएं।